3 मार्च को आसमान में दिखेगा ‘ब्लड मून’, जानिए कब और कैसे देखें यह दुर्लभ नजारा,

वर्ष 2026 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगेगा, जिससे चंद्रमा गहरा लाल दिखाई देगा। भारत, एशिया और अमेरिका में दिखने वाले इस ग्रहण का सूतक काल होली से ठीक पहले पड़ेगा। दोपहर 3:20 से शुरू होकर यह शाम 6:48 तक चलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इसे नंगी आंखों से देखना सुरक्षित है।

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BNT Desk: वर्ष 2026 की शुरुआत एक अद्भुत खगोलीय घटना के साथ होने जा रही है। 3 मार्च 2026, मंगलवार को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) लगने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह एक अत्यंत गहरा ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की प्रच्छाया (डार्क शैडो) में छिप जाएगा। इस दौरान आसमान में चंद्रमा का रंग बदलकर गहरा लाल या तांबे जैसा हो जाएगा, जिसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है।

क्या होता है पूर्ण चंद्र ग्रहण?

खगोल विज्ञान के नजरिए से देखें तो चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच इस तरह आ जाती है कि चंद्रमा पर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ती। जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया से ढक जाता है, तो इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं। 3 मार्च को होने वाले इस ग्रहण का परिमाण 1.155 रहेगा, जिसका अर्थ है कि यह काफी गहरा और स्पष्ट दिखाई देने वाला ग्रहण होगा।

भारत समेत कई देशों में दिखेगा ग्रहण

यह चंद्र ग्रहण भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कई हिस्सों में भी दिखाई देगा। भारत में अधिकतर जगहों पर चंद्रोदय के समय ग्रहण का अंतिम चरण देखा जा सकेगा। उत्तर-पूर्वी भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ इलाकों में ग्रहण के पूर्ण चरण का अंतिम हिस्सा भी दिखाई देगा। इसलिए इन क्षेत्रों के लोगों को यह दृश्य ज्यादा स्पष्ट रूप से देखने का अवसर मिलेगा।

भारत में ग्रहण का समय (IST)

  1. ग्रहण का प्रारंभ: दोपहर 3:20 बजे
  2. पूर्णता का प्रारंभ: शाम 4:34 बजे
  3. पूर्णता की समाप्ति: शाम 5:33 बजे
  4. ग्रहण की समाप्ति: शाम 6:48 बजे

विशेषज्ञों के अनुसार, चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है। इसके लिए किसी खास चश्मे या उपकरण की जरूरत नहीं होती। छात्र, विज्ञान प्रेमी और आम लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना का आनंद ले सकते हैं।

देखने के लिए बरतें सावधानी

अक्सर लोग सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के बीच भ्रमित हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्य ग्रहण को बिना चश्मे के देखना हानिकारक हो सकता है, लेकिन चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है। इसके लिए आपको किसी विशेष फिल्टर या टेलिस्कोप की जरूरत नहीं है; आप इसे सीधे आसमान में देख सकते हैं।

धार्मिक महत्व और होली पर असर

चूंकि यह ग्रहण होली के त्योहार से ठीक पहले लग रहा है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व काफी बढ़ गया है। भारतीय परंपरा के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूतक काल प्रभावी रहता है, जिसमें मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ वर्जित होता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद पवित्र नदियों या जलाशयों में स्नान करने और दान-पुण्य करने की पुरानी परंपरा है, जिसका पालन कई श्रद्धालु करेंगे।

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