टोक्यो हाई कोर्ट: समलैंगिक विवाह को मान्यता न देना संवैधानिक

टोक्यो हाई कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता न देने के सरकार के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने इसे संवैधानिक बताया, जिससे समान अधिकारों के लिए लड़ रहे लोगों को बड़ा झटका लगा है। याचिकाकर्ताओं ने निराशा जताई और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।

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BNT, Desk: टोक्यो हाई कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता न देने के सरकार के फैसले को सही ठहराया है। शुक्रवार को आया यह फैसला समान-विवाह अधिकारों के लिए लड़ रहे लोगों के लिए एक बड़ा झटका है। कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि समलैंगिक विवाह को मान्यता न देना संवैधानिक है, यानी इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि विवाह को आम तौर पर एक पुरुष और एक महिला के बीच का संबंध माना जाता है। इसके साथ ही, कोर्ट ने उन याचिकाकर्ताओं को मुआवजा देने से भी इनकार कर दिया, जिन्होंने सरकार से 10 लाख येन के मुआवजे की मांग की थी।

दरअसल, यह फैसला पिछले साल निचली अदालत के उस फैसले को पलट देता है, जिसमें याचिकाकर्ताओं को जीत मिली थी। उस समय निचली अदालत ने समलैंगिक विवाह को मान्यता न देने को असंवैधानिक बताया था। कोर्ट के इस फैसले से याचिकाकर्ता बेहद निराश हैं। हिरोमी हाटोगया ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “मैं इस फैसले से बहुत निराश और स्तब्ध हूं। क्या न्यायाधीश हमारी बात सुन भी रहे थे?” एक अन्य याचिकाकर्ता, री फुकुदा ने भावनात्मक रूप से कहा, “हम सिर्फ शादी करना चाहते हैं और किसी भी अन्य व्यक्ति की तरह खुश रहना चाहते हैं। हमें विश्वास है कि समाज बदल रहा है, और हम हार नहीं मानेंगे।”

इस फैसले के बाद, याचिकाकर्ताओं और उनके वकील ने इसे अन्यायपूर्ण बताया है और सुप्रीम कोर्ट तक अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है। जापान में इस तरह के कई मामले अभी भी चल रहे हैं, और उम्मीद है कि अगला फैसला अगले साल तक जापानी सुप्रीम कोर्ट से आएगा। आपको बता दें कि G-7 देशों में जापान अकेला ऐसा देश है जो समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं देता है। सत्ता में बैठी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी भी समलैंगिक विवाह की मुखर विरोधी है और उसका तर्क है कि घटती जनसंख्या के कारण प्राकृतिक प्रजनन को महत्व देना चाहिए।

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