बांग्लादेश में छात्रों का सरकार को अल्टीमेटम, न्याय तक नहीं होंगे चुनाव

बांग्लादेश में छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद भारी बवाल मचा हुआ है। 'इंकलाब मंच' ने चेतावनी दी है कि जब तक कातिलों को सजा नहीं मिलती, देश में चुनाव नहीं होने देंगे। छात्रों के इस अल्टीमेटम और लगातार बढ़ती हिंसा ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

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BNT Desk: बांग्लादेश में हालात एक बार फिर बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद देश में गुस्से की लहर है। छात्रों के संगठन ‘इंकलाब मंच’ ने साफ कर दिया है कि जब तक उस्मान हादी के हत्यारों को सजा नहीं मिल जाती, तब तक देश में कोई भी चुनाव नहीं होने दिया जाएगा। छात्रों के इस अल्टीमेटम ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार की नींद उड़ा दी है।

क्या है पूरा मामला और क्यों भड़के हैं छात्र?

उस्मान हादी, जो पिछले साल हुए छात्र विद्रोह के मुख्य चेहरों में से एक थे, उन्हें 12 दिसंबर को ढाका के पलटन इलाके में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहाँ 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। अभी इस घटना का गुस्सा शांत भी नहीं हुआ था कि सोमवार को खुलना शहर में एक और छात्र नेता के सिर में गोली मार दी गई। इन लगातार हो रहे हमलों से छात्र भड़क उठे हैं और सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

सरकार के सामने रखी गई दो बड़ी मांगें

छात्र संगठन के सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार को दो टूक चेतावनी दी है। उनकी पहली मांग है कि 24 घंटे के भीतर एक स्पेशल ट्रिब्यूनल बनाया जाए जो इस हत्याकांड की सुनवाई करे। छात्रों का कहना है कि अगर जरूरत पड़े तो FBI या स्कॉटलैंड यार्ड जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद ली जाए ताकि जांच निष्पक्ष हो। दूसरी मांग यह है कि हत्यारों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और अगर वे देश छोड़कर भाग गए हैं, तो उन्हें वापस लाया जाए।

चुनाव पर मंडराया संकट

छात्रों ने साफ़ कहा है कि न्याय मिलने से पहले मतदान नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे शाहबाग से लेकर शहीद मीनार तक बड़ा विरोध मार्च निकालेंगे और पूरे देश में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर देंगे। छात्रों के इस कड़े रुख को देखते हुए यूनुस सरकार ने आनन-फानन में मामले की ‘फास्ट-ट्रैक’ सुनवाई का भरोसा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार छात्रों के इस गुस्से को शांत कर पाती है या बांग्लादेश एक बार फिर बड़े आंदोलन की आग में झुलसेगा।

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