BNT Desk: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया के सबसे चर्चित चेहरे और OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने नई दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में भविष्य की तकनीक और समाज पर इसके प्रभाव को लेकर कई चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उनके संबोधन ने न केवल तकनीक की शक्ति को रेखांकित किया, बल्कि आने वाली चुनौतियों और अवसरों का खाका भी खींचा।
नौकरियों का बदलता स्वरूप और AI की शक्ति
सैम ऑल्टमैन ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि AI आने वाले समय में कई मौजूदा नौकरियों की प्रकृति को पूरी तरह बदल देगा। उन्होंने तर्क दिया कि AI और GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) की कार्यक्षमता इतनी तीव्र है कि कई क्षेत्रों में इंसानों के लिए इस गति का मुकाबला करना लगभग असंभव होगा। हालांकि, उन्होंने सकारात्मक पक्ष रखते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि तकनीक हमेशा बदलाव लाती है और हर नए दौर में समाज नए काम और बेहतर अवसर तलाशने में सफल रहता है।
AI क्रांति में भारत की केंद्रीय भूमिका
ऑल्टमैन ने भारत को AI के भविष्य के लिए एक ‘पावरहाउस’ बताया। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े और तथ्य साझा किए:
- उपयोगकर्ताओं की संख्या: भारत में हर हफ्ते 10 करोड़ से ज्यादा लोग ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें छात्रों की बड़ी भागीदारी है।
- कोडिंग में बढ़त: भारत OpenAI के कोडिंग टूल ‘Codex’ के लिए दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बन चुका है।
- भविष्य का निर्माता: ऑल्टमैन के अनुसार, भारत अब केवल AI का उपभोक्ता नहीं है, बल्कि वह इस तकनीक के वैश्विक भविष्य को आकार देने की क्षमता रखता है।
सुपरइंटेलिजेंस और 2028 का लक्ष्य
समिट के दौरान ‘सुपरइंटेलिजेंस’ पर चर्चा करते हुए ऑल्टमैन ने कहा कि अगले कुछ वर्षों में AI इतना उन्नत हो जाएगा कि वह दुनिया की बड़ी कंपनियों के सीईओ या शीर्ष वैज्ञानिकों से भी अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा। उन्होंने एक बड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा कि 2028 तक दुनिया की कुल बौद्धिक क्षमता का एक बड़ा हिस्सा इंसानी दिमागों के बजाय डेटा सेंटर्स में मौजूद हो सकता है।
AI का लोकतंत्रीकरण और वैश्विक नियम
तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए ऑल्टमैन ने ‘AI के लोकतंत्रीकरण’ पर जोर दिया। उनका मानना है कि यदि यह तकनीक चुनिंदा देशों या कंपनियों तक सीमित रही, तो यह मानवता के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने परमाणु ऊर्जा की तर्ज पर AI के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समन्वय संस्था बनाने का प्रस्ताव दिया, जो वैश्विक स्तर पर मानक तय करे और इस तकनीक की निगरानी सुनिश्चित करे।