गाजा में पाकिस्तानी फौज? ट्रंप का वो प्लान जिसने जनरल आसिम मुनीर की नींद उड़ा दी है!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गाजा में शांति के लिए पाकिस्तान पर अपनी सेना भेजने का दबाव बना रहे हैं। ट्रंप के 20-सूत्रीय प्लान के तहत पाकिस्तानी फौज को गाजा में तैनात करने की बात है। इसी सिलसिले में पाक आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर जल्द वॉशिंगटन जा सकते हैं, जिससे पाकिस्तान में बड़ा विवाद छिड़ गया है।

BNT
By
3 Min Read

BNT Desk: पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर इस वक्त एक बड़ी मुसीबत में फंसते नजर आ रहे हैं। मामला जुड़ा है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्लान से, जिसमें वो गाजा में शांति बनाए रखने के लिए मुस्लिम देशों की एक ‘संयुक्त फौज’ तैनात करना चाहते हैं। खबर है कि ट्रंप ने इसके लिए पाकिस्तान पर भी दबाव बनाया है। इसी सिलसिले में जनरल मुनीर आने वाले हफ्तों में वॉशिंगटन जा सकते हैं, जहाँ ट्रंप के साथ उनकी यह पिछले 6 महीनों में तीसरी मुलाकात होगी।

क्या है ट्रंप का ‘गाजा प्लान’?

डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्ताव है कि युद्ध से तबाह हो चुके गाजा के पुनर्निर्माण और सुरक्षा की जिम्मेदारी मुस्लिम देशों की सेनाएं संभालें। ट्रंप चाहते हैं कि पाकिस्तान जैसे देश अपनी फौज वहां भेजें ताकि हमास को पीछे धकेला जा सके और इलाके में स्थिरता आए। हालांकि, पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देश इस बात को लेकर डरे हुए हैं कि अगर उनकी सेना वहां गई, तो उनका सीधा टकराव हमास से हो सकता है, जिससे उनके अपने देश में लोग भड़क सकते हैं।

मुनीर के लिए ‘आगे कुआँ, पीछे खाई’

जनरल आसिम मुनीर के लिए यह किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ अमेरिका का दबाव है, जिसे नाराज करना पाकिस्तान के लिए भारी पड़ सकता है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए अमेरिकी मदद और निवेश बहुत जरूरी है। जानकारों का कहना है कि अगर मुनीर ने ट्रंप की बात नहीं मानी, तो अमेरिका पाकिस्तान से मुंह मोड़ सकता है। वहीं दूसरी तरफ, अगर पाकिस्तान अपनी फौज गाजा भेजता है, तो देश के भीतर मौलाना और विपक्षी दल इसे ‘इजरायल की मदद’ करार देकर बड़ी बगावत खड़ी कर सकते हैं।

बढ़ती बेचैनी और मुनीर की भागदौड़

अपनी इसी चिंता को दूर करने के लिए जनरल मुनीर पिछले कुछ हफ्तों से लगातार इंडोनेशिया, मलेशिया, सऊदी अरब, तुर्किये और कतर जैसे देशों के चक्कर लगा रहे हैं। वो इन देशों के सैन्य अधिकारियों से मिलकर एक बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में जनता का मिजाज देखते हुए फौज भेजना आत्मघाती कदम हो सकता है। अब देखना यह होगा कि वॉशिंगटन दौरे पर मुनीर ट्रंप को कैसे मनाते हैं और पाकिस्तान को इस संकट से कैसे बाहर निकालते हैं।

Share This Article