गलगोटिया यूनिवर्सिटी: विदेशी तकनीक को अपना बताने का आरोप, रोबोटिक कुत्तों के बाद अब 'सॉकर ड्रोन' पर बढ़ा विवाद

गलगोटिया यूनिवर्सिटी फिर विवादों में है। चीनी रोबोटिक कुत्तों के बाद, अब दक्षिण कोरियाई 'सॉकर ड्रोन' को खुद बनाने का झूठा दावा करने पर यूनिवर्सिटी की आलोचना हो रही है। प्रोफेसर के इस दावे ने संस्थान की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या वे वाकई इनोवेशन कर रहे हैं।

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BNT Desk: गलगोटिया यूनिवर्सिटी के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रोबोटिक कुत्तों (Chinese Robodogs) के विवाद के बाद अब एक नए ‘सॉकर ड्रोन’ को लेकर यूनिवर्सिटी सवालों के घेरे में है।

रोबोटिक कुत्तों का पुराना विवाद

हाल ही में गलगोटिया यूनिवर्सिटी को ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ से बाहर कर दिया गया था। इसका मुख्य कारण चीन में बने ‘रोबोटिक कुत्तों’ को लेकर हुआ विवाद था। यूनिवर्सिटी पर आरोप लगा था कि उन्होंने विदेशी तकनीक को अपना बताकर पेश किया, जिसके बाद उनकी काफी किरकिरी हुई थी।

अब ‘सॉकर ड्रोन’ पर नया हंगामा

अभी पिछला विवाद थमा भी नहीं था कि यूनिवर्सिटी एक नए संकट में फंस गई है। इस बार मामला एक ‘सॉकर ड्रोन’ (फुटबॉल खेलने वाला ड्रोन) का है। यह ड्रोन दक्षिण कोरिया का बना हुआ बताया जा रहा है, लेकिन यूनिवर्सिटी के दावों ने एक बार फिर संदेह पैदा कर दिया है।

प्रोफेसर का दावा और सच्चाई

विवाद तब शुरू हुआ जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि इस सॉकर ड्रोन को यूनिवर्सिटी के छात्रों और टीम ने बिल्कुल शुरुआत (Scratch) से खुद बनाया है। हालांकि, जांच और सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं के अनुसार, यह उत्पाद दक्षिण कोरिया की एक कंपनी का लग रहा है। लोगों का कहना है कि यह खुद बनाने का दावा पूरी तरह गलत है और यूनिवर्सिटी केवल दूसरे के उत्पादों पर अपना ठप्पा लगा रही है।

यूनिवर्सिटी की साख पर सवाल

एक के बाद एक सामने आ रहे इन मामलों ने यूनिवर्सिटी की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा जगत और सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि:

  1. क्या यूनिवर्सिटी वाकई इनोवेशन कर रही है या सिर्फ विदेशी सामान खरीदकर श्रेय ले रही है?
  2. प्रोफेसरों द्वारा इस तरह के गलत दावे क्यों किए जा रहे हैं?
  3. इन विवादों का असर वहां पढ़ रहे छात्रों के भविष्य पर क्या पड़ेगा?

फिलहाल, गलगोटिया यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस नए विवाद पर कोई ठोस सफाई नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस ‘कॉपी-पेस्ट’ तकनीक को लेकर उनकी जमकर आलोचना हो रही है।

 

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