चापलूसी या कूटनीति? ट्रंप के 'फेवरेट फील्ड मार्शल' बने आसिम मुनीर, भारत के लिए बढ़ी टेंशन

साल 2025 में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने चापलूसी और व्यापारिक डील्स के दम पर डोनाल्ड ट्रंप को अपना मुरीद बना लिया है। ट्रंप द्वारा मुनीर को 'फेवरेट फील्ड मार्शल' कहना और भारत पर टैरिफ लगाना दक्षिण एशिया में नए कूटनीतिक संकट और भारत की सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता का संकेत है।

BNT
By
4 Min Read

BNT Desk: साल 2025 का आज आखिरी दिन है और जाते-जाते अंतरराष्ट्रीय राजनीति से एक ऐसी खबर आई है जिसने भारत के सुरक्षा गलियारों में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो कभी पाकिस्तान को ‘धोखेबाज’ कहते थे, आज पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर की तारीफों के पुल बांध रहे हैं। ट्रंप ने मुनीर को अपना ‘पसंदीदा फील्ड मार्शल’ और ‘महान योद्धा’ तक कह डाला है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर रातों-रात यह समीकरण कैसे बदल गया? क्या पाकिस्तान ने अपनी पुरानी आदत ‘चापलूसी’ और ‘लालच’ के दम पर ट्रंप को अपने पाले में कर लिया है?

मई 2025 का वो संघर्ष और पाकिस्तान की चाल

इस दोस्ती की नींव मई 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान पड़ी। जब भारत ने आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुँचाया, तब बुरी तरह घिरे पाकिस्तान ने एक सोची-समझी चाल चली। जैसे ही सीजफायर हुआ, ट्रंप ने इसका पूरा श्रेय खुद लेना शुरू कर दिया। भारत ने तो ट्रंप के दावों को खारिज किया, लेकिन पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ ने मौके का फायदा उठाते हुए ट्रंप को ‘शांति का मसीहा’ बताना शुरू कर दिया। उन्होंने तो ट्रंप का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी आगे बढ़ा दिया, जो ट्रंप के दिल को छू गया।

मुनीर बने ‘सोल्जर-डिप्लोमैट’ और ट्रंप को दिए बड़े ऑफर

पाकिस्तान ने समझ लिया था कि ट्रंप को डील पसंद है। जून 2025 में जब मुनीर व्हाइट हाउस पहुंचे, तो उन्होंने केवल सैन्य बातें नहीं कीं, बल्कि ट्रंप को ‘इकोनॉमिक डील’ का लालच दिया। पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के कीमती खनिज (Rare Earth Minerals), ट्रेड ऑफर और यहां तक कि क्रिप्टो करेंसी से जुड़ी डील्स की मेज सजा दी। यही नहीं, मुनीर ने वादा किया कि वे आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का पूरा साथ देंगे। इस ‘ट्रांजेक्शनल डिप्लोमेसी’ ने काम किया और देखते ही देखते ट्रंप, जो कभी पाकिस्तान को खतरनाक देश मानते थे, मुनीर के मुरीद हो गए।

भारत के लिए क्यों है यह खतरे की घंटी?

पाकिस्तान की यह नई ‘ट्रंप-भक्ति’ भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है। भारत और अमेरिका के बीच जो मजबूत रिश्ता पिछले कुछ सालों में बना था, उसमें अब पाकिस्तान एक रुकावट की तरह खड़ा हो रहा है। अमेरिका से मिले समर्थन के बाद पाकिस्तान की सैन्य ताकत और उसकी हिम्मत, दोनों बढ़ने की आशंका है। भारत के लिए चिंता की बात यह भी है कि ट्रंप ने भारत पर भारी टैरिफ लगाए हैं, जबकि पाकिस्तान को व्यापार में छूट मिल रही है। यह बदलता रुख क्वाड और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी असर डाल सकता है, जो भारत की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।

क्या टिकाऊ है ट्रंप और मुनीर का यह ‘रिश्ता’?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की नीतियां अक्सर अनिश्चित होती हैं और पाकिस्तान की आर्थिक हालत अभी भी बेहद नाजुक है। भले ही आसिम मुनीर ने चापलूसी और लालच के दम पर 2025 में बाजी मार ली हो, लेकिन क्या यह रिश्ता 2026 में भी टिक पाएगा? भारत के लिए अब चुनौती यह है कि वह अपनी सैन्य तैयारी और कूटनीति को और मजबूत करे, ताकि पाकिस्तान के इस नए नैरेटिव का मुकाबला किया जा सके। फिलहाल, मुनीर और ट्रंप की यह नजदीकियां दक्षिण एशिया के पावर बैलेंस को बिगाड़ने की पूरी ताकत रखती हैं।

Share This Article