क्या पुरुष भी हो सकते हैं गर्भवती? अमेरिकी संसद में भारतीय डॉक्टर और रिपब्लिकन सीनेटर के बीच तीखी बहस

अमेरिकी संसद में गर्भपात कानून पर चर्चा के दौरान सीनेटर जोश हॉली और भारतीय मूल की डॉक्टर निशा वर्मा के बीच तीखी बहस हुई। विवाद तब बढ़ा जब डॉक्टर ने "क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?" सवाल का सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया, जिसे सीनेटर ने जैविक सच्चाई का अपमान बताया।

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BNT Desk: अमेरिका में इन दिनों प्रजनन स्वास्थ्य और गर्भपात की दवाओं पर मचे घमासान के बीच एक अजीबोगरीब बहस छिड़ गई है। हाल ही में अमेरिकी संसद (सीनेट) की एक सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली और भारतीय मूल की अमेरिकी डॉक्टर निशा वर्मा के बीच इस बात को लेकर जबरदस्त बहस हुई कि क्या “जैविक पुरुष” गर्भवती हो सकते हैं। यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब डॉक्टर वर्मा गर्भपात की दवाओं पर लगे प्रतिबंधों का विरोध कर रही थीं।

आखिर बहस की शुरुआत कैसे हुई?

दरअसल, यह बहस तब शुरू हुई जब सीनेटर जोश हॉली ने डॉक्टर निशा वर्मा से सीधा सवाल पूछा कि क्या पुरुषों के लिए गर्भवती होना संभव है। डॉक्टर वर्मा ने इस सवाल का सीधे “हाँ” या “ना” में जवाब देने के बजाय कहा कि वह अलग-अलग पहचान वाले मरीजों का इलाज करती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि वह विज्ञान की जानकार हैं और उनका काम मरीजों के जटिल अनुभवों को समझना है। डॉक्टर का यह गोलमोल जवाब सुनकर सीनेटर भड़क गए और उन्होंने डॉक्टर पर तथ्यों को घुमाने का आरोप लगाया।

सीनेटर ने विज्ञान और सच्चाई पर उठाए सवाल

सीनेटर जोश हॉली ने बहस को और तेज करते हुए कहा कि यह एक बुनियादी सच्चाई है कि केवल महिलाएं ही गर्भवती हो सकती हैं, पुरुष नहीं। उन्होंने डॉक्टर वर्मा से कहा, “आप एक विशेषज्ञ हैं और साक्ष्यों पर बात करती हैं, तो फिर इस साधारण सी बात को स्वीकार करने में हिचकिचाहट क्यों?” हॉली का कहना था कि पुरुषों और महिलाओं के बीच एक वैज्ञानिक अंतर होता है और इसे नकारना विज्ञान और महिलाओं की सुरक्षा के लिए हानिकारक है।

इस विवाद के पीछे की असली वजह

इस पूरी बहस को अमेरिका की मौजूदा राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वहां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच गर्भपात और लैंगिक पहचान को लेकर पुरानी जंग चल रही है। जहाँ एक तरफ डॉक्टर वर्मा जैसे विशेषज्ञ व्यक्तिगत पहचान और स्वास्थ्य अधिकारों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति ट्रंप और उनके साथी नेता “जैविक वास्तविकता” को आधार बनाकर कड़े नियम लागू करने के पक्ष में हैं। इस तीखी बहस ने सोशल मीडिया पर भी लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है।

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