BNT Desk: बांग्लादेश एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस रहा है। पिछले साल हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे ‘शरीफ उस्मान हादी’ की मौत की खबर के बाद पूरे देश में तनाव फैल गया है। राजधानी ढाका के शाहबाग और कारवां बाजार जैसे इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया। गुस्साए लोगों ने मशहूर अखबार ‘प्रोथोम आलो’ और ‘डेली स्टार’ के दफ्तरों को निशाना बनाया, जहाँ तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी गई। इस दौरान कई पत्रकार और कर्मचारी इमारत के अंदर ही फंसे रहे।
कैसे हुई हादी की मौत और क्यों भड़के लोग?
शरीफ उस्मान हादी, जो आगामी 12 फरवरी के आम चुनाव में उम्मीदवार थे, उन पर पिछले सप्ताह ढाका के विजयनगर में हमला हुआ था। नकाबपोश बंदूकधारियों ने उनके सिर में गोली मार दी थी। उनकी नाजुक हालत को देखते हुए अंतरिम सरकार ने उन्हें एयर एंबुलेंस से सिंगापुर भेजा था, लेकिन गुरुवार रात उनकी मौत हो गई। जैसे ही यह खबर फैली, ढाका यूनिवर्सिटी के छात्र और आम लोग सड़कों पर उतर आए। लोग “हादी, हादी” के नारे लगा रहे हैं और उनकी हत्या के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
भारत पर आरोप और हाई कमीशन को बंद करने की मांग
इस पूरे मामले में एक नया मोड़ तब आया जब प्रदर्शनकारी संगठनों (जैसे नेशनल सिटीजन पार्टी) ने आरोप लगाया कि हादी पर हमला करने वाले अपराधी सीमा पार कर भारत भाग गए हैं। छात्रों के एक गुट ने भारत विरोधी नारे लगाए और अंतरिम सरकार से मांग की है कि जब तक हमलावरों को वापस नहीं लाया जाता, तब तक ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग को बंद रखा जाए। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान के पुराने आवास पर भी हमला किया है।
सरकार का रुख और पत्रकारों का डर
हालात को बिगड़ता देख अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने देश के नाम संबोधन दिया। उन्होंने हादी की मौत पर दुख जताया और हत्यारों को कड़ी सजा देने का वादा किया है। सरकार ने एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। वहीं दूसरी तरफ, ढाका के पत्रकारों का कहना है कि देश में डर का माहौल है। आरोप है कि जो भी सरकार की आलोचना कर रहा है, उसे गिरफ्तार किया जा रहा है। सड़कों पर पुलिस और सेना तैनात है, फिर भी भीड़ बेकाबू नजर आ रही है।