बलूचिस्तान से उठी दर्दभरी आवाज; मानवाधिकार उल्लंघन पर अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग

बलूच नेता मीर यार बलूच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान का दौरा करने की अपील की है। उन्होंने पाकिस्तान पर 'सैन्य आतंकवाद' और मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि दुनिया खुद आकर जमीनी हकीकत और संसाधनों की लूट देखे, ताकि बलूच लोगों को न्याय मिल सके।

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BNT Desk: बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन और बढ़ते तनाव के बीच, बलूच नेता मीर यार बलूच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बड़ी अपील की है। उन्होंने दुनिया से आग्रह किया है कि वे पाकिस्तान के दावों पर भरोसा करने के बजाय खुद जमीन पर आकर सच्चाई देखें।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को खुला न्योता

बलूच नेता मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (Twitter) पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और ओआईसी (OIC) को बलूचिस्तान आने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सरकार बलूचिस्तान के लोगों की आवाज को दबाने के लिए उन पर ‘आतंकवाद’ का ठप्पा लगा रही है। मीर ने सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि यहां आकर खुद अपनी आंखों से देखें कि पाकिस्तान सरकार वहां के लोगों का किस तरह शोषण कर रही है।

“मिलिट्री आतंकवाद” का लगाया आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, बलूच नेता ने स्पष्ट किया कि बलूचिस्तान के लोग आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि वे खुद सरकार द्वारा प्रायोजित ‘मिलिट्री आतंकवाद’ का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि संयुक्त राष्ट्र में बलूचिस्तान के प्रतिनिधियों को बुलाया जाना चाहिए और उनकी बात को सीधे सुना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान दुनिया के सामने एकतरफा झूठ फैलाता है, जबकि वहां के स्थानीय लोग दशकों से बुनियादी हक और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

सामूहिक कब्रें और गुमशुदा लोगों का दर्द

इस अपील में एक बेहद चौंकाने वाला हिस्सा ‘सामूहिक कब्रों’ का है। मीर यार बलूच ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय टीमें बलूचिस्तान की उन जगहों का दौरा करें जहाँ सामूहिक कब्रें मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि वहां से डीएनए सैंपल (DNA samples) लेकर उन हजारों लोगों की पहचान की जा सकती है जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने पिछले आठ दशकों में जबरन हिरासत में लिया और जो फिर कभी घर नहीं लौटे। यह परिवारों के लिए अपने बिछड़े हुए लोगों से मिलने या उनकी सच्चाई जानने का एकमात्र रास्ता बचा है।

संसाधनों की लूट और स्थानीय लोगों की बदहाली

अपील में यह भी कहा गया कि विदेशी प्रतिनिधि डेरा बुगती और सुई के गैस क्षेत्रों के साथ-साथ सैंदक और रको डिक की सोने की खदानों का भी दौरा करें। मीर का कहना है कि इन इलाकों से पाकिस्तान को बेशुमार दौलत मिलती है, लेकिन यहाँ रहने वाले स्थानीय बलूच लोग आज भी दाने-दाने को मोहताज और बदहाल हैं। उन्होंने कहा कि जब तक दुनिया सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं करेगी, तब तक पाकिस्तान की सरकार और सेना इसी तरह बलूचिस्तान के संसाधनों को लूटती रहेगी और वहां के लोगों का दमन करती रहेगी।

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