नेपाल की राजनीति में नए युग का उदय: बालेन शाह ने ली 43वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ

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BNT Desk: हिमालयी राष्ट्र नेपाल के राजनीतिक इतिहास में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। काठमांडू के बेहद लोकप्रिय और युवा नेता बालेन शाह (बालेंद्र शाह) ने आधिकारिक तौर पर नेपाल के 43वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। शीतल निवास (राष्ट्रपति भवन) में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

पेशे से स्ट्रक्चरल इंजीनियर और रैपर से राजनेता बने बालेन शाह का प्रधानमंत्री पद तक का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उनकी यह नियुक्ति नेपाल की पारंपरिक राजनीति के लिए एक बड़ा बदलाव और युवाओं की आकांक्षाओं की जीत मानी जा रही है।

शपथ ग्रहण समारोह: शक्ति प्रदर्शन और सादगी का मेल

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में निवर्तमान प्रधानमंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता, विदेशी राजनयिक और उच्च पदस्थ अधिकारी मौजूद रहे। बालेन शाह ने अपनी पहचान के अनुरूप पारंपरिक नेपाली पोशाक ‘दौरा सुरुवाल’ में शपथ ली। शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने देश के नाम अपने पहले संबोधन में “पारदर्शिता, सुशासन और विकास” को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया।

काठमांडू के मेयर से देश के पीएम तक का सफर

बालेन शाह की राजनीतिक यात्रा साल 2022 में तब चर्चा में आई जब उन्होंने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में काठमांडू महानगरपालिका के मेयर का चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था।

  • युवाओं के आइकन: मेयर के रूप में उनके साहसिक फैसलों, जैसे अतिक्रमण हटाना, कचरा प्रबंधन में सुधार और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने ने उन्हें पूरे नेपाल में ‘यूथ आइकन’ बना दिया।

  • बदलाव की लहर: पुरानी पार्टियों—नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और माओवादी केंद्र—के वर्चस्व वाले देश में बालेन शाह ने यह साबित कर दिया कि जनता अब ‘स्टेटस को’ (यथास्थिति) से ऊब चुकी है और ठोस परिणाम चाहती है।

बालेन सरकार की चुनौतियां

भले ही बालेन शाह ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाल ली है, लेकिन उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है:

  1. गठबंधन की राजनीति: नेपाल की संसद में बहुमत साबित करना और अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को एक साथ लेकर चलना उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

  2. आर्थिक संकट: बढ़ती मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति को सुधारना उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए।

  3. विदेश नीति: भारत और चीन जैसे दो शक्तिशाली पड़ोसियों के बीच संतुलन बनाए रखना बालेन शाह के लिए कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।

भारत-नेपाल संबंधों पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली और काठमांडू के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध हैं। बालेन शाह की छवि एक व्यावहारिक और तकनीकी सोच वाले नेता की है। जानकारों का मानना है कि वे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स, जलविद्युत (Hydropower) और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करना चाहेंगे। उनके प्रधानमंत्री बनने से द्विपक्षीय संबंधों में एक नई ऊर्जा और आधुनिक दृष्टिकोण की उम्मीद की जा रही है।

नेपाल के युवाओं में भारी उत्साह

बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने की खबर फैलते ही काठमांडू की सड़कों पर जश्न का माहौल देखा गया। युवाओं का मानना है कि एक इंजीनियर का प्रधानमंत्री बनना देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। बालेन ने अपने समर्थकों से वादा किया है कि उनकी सरकार “काम बोलता है” के सिद्धांत पर चलेगी, न कि खोखले राजनीतिक वादों पर।

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