अमेरिका-ईरान जंग: 40 दिन के खूनी संघर्ष के बाद 2 हफ्ते के सीजफायर पर बनी सहमति

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: पिछले 40 दिनों से दुनिया जिस महायुद्ध की आहट से सहमी हुई थी, उस पर फिलहाल दो हफ्तों के लिए विराम लग गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग के बाद आखिरकार दोनों पक्ष 14 दिनों के ‘सीजफायर’ (युद्धविराम) पर सहमत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए दुनिया को शांति का संदेश दिया है। इस समझौते को वैश्विक अर्थव्यवस्था और खास तौर पर तेल बाजार के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

ट्रम्प का बयान: शहबाज शरीफ और पाक आर्मी चीफ की अपील का असर

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस से जानकारी देते हुए बताया कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के आर्मी चीफ ने व्यक्तिगत रूप से उनसे और ईरान से युद्ध रोकने की अपील की थी। ट्रम्प के मुताबिक, पाकिस्तान के इस कूटनीतिक प्रयास और मानवीय आधार पर दी गई दलीलों के बाद अमेरिका ने दो हफ्ते तक हमले रोकने का फैसला किया है।

होर्मुज स्ट्रेट: ट्रम्प की वो चेतावनी जिसने ईरान को झुकाया

सीजफायर से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रम्प का अंदाज काफी आक्रामक था। उन्होंने ईरान को सीधी चेतावनी दी थी कि अगर वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते ‘होर्मुज स्ट्रेट’ से जहाजों की आवाजाही को रोका गया, तो अंजाम बुरा होगा। ट्रम्प ने यहाँ तक कह दिया था कि “अगर जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला, तो अमेरिका ईरान की पूरी सभ्यता को खत्म करने और उसके अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को मटियामेट करने में संकोच नहीं करेगा।” माना जा रहा है कि इसी दबाव और चीन के दखल के बाद ईरान ने बातचीत की मेज पर आना बेहतर समझा।

समझौते की शर्तें: क्या-क्या हुआ तय?

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस डील को अंतिम रूप देने में चीन ने भी पर्दे के पीछे से बड़ी भूमिका निभाई है। समझौते के तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनी है:

  • हमलों पर रोक: अमेरिका और इजराइल ईरान पर अपने हवाई और मिसाइल हमले तुरंत प्रभाव से रोक देंगे। बदले में ईरान भी अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा।

  • जहाजों की सुरक्षा: सबसे महत्वपूर्ण शर्त ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को लेकर है। अब ईरानी सेना की मदद से तेल, गैस और अन्य कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।

  • औपचारिक बातचीत: 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हाई-लेवल डिप्लोमैटिक बातचीत शुरू होगी।

तेहरान में जश्न और ‘जीत’ का दावा

सीजफायर के ऐलान के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला। एक तरफ जहाँ लोग जंग रुकने से राहत महसूस कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ इसे अपनी ‘जीत’ बताकर जश्न मनाया गया। तेहरान की सड़कों पर लोगों ने अमेरिका और इजराइल के झंडे जलाए और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीरें लहराईं।

ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ ने दावा किया है कि यह समझौता उनकी शर्तों पर हुआ है। काउंसिल के मुताबिक, उन्होंने अमेरिका को एक 10 पॉइंट का शांति प्रस्ताव भेजा था, जिसे वाशिंगटन ने स्वीकार कर लिया है। हालांकि, ट्रम्प का कहना है कि यह केवल बातचीत की शुरुआत है और प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

पाकिस्तान बना केंद्र बिंदु

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक ‘शांतिदूत’ के रूप में उभरकर सामने आया है। भौगोलिक और कूटनीतिक रूप से ईरान और अमेरिका दोनों के करीब होने के कारण इस्लामाबाद ने इस संकट को सुलझाने के लिए ‘बैकचैनल’ बातचीत का सहारा लिया। 10 अप्रैल को होने वाली बैठक पर अब पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यही बैठक तय करेगी कि यह दो हफ्ते का सीजफायर स्थायी शांति में बदलेगा या फिर बारूद का ढेर दोबारा दहक उठेगा।

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