सुप्रीम कोर्ट में जजों के सामने गोभी की बात, याचिका तुरंत मंजूर!

हेट स्पीच मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक अनोखा मोड़ आया। सीनियर एडवोकेट निजाम पाशा ने अल्पसंख्यकों के आर्थिक बहिष्कार और सब्जी मंडियों में गोभी न खरीदने की अपील का ज़िक्र किया। इस बात पर जजों ने तुरंत उनकी हस्तक्षेप याचिका को स्वीकार कर लिया। पाशा ने कोर्ट से राज्य सरकारों द्वारा कार्रवाई न करने पर दिशा-निर्देश बनाने की अपील की है।

BNT
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Bihar News Today, Desk: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (25 नवंबर) को एक अनोखा मोड़ देखने को मिला, जब हेट स्पीच (नफ़रत फैलाने वाले भाषण) से जुड़े एक मामले में सीनियर एडवोकेट निजाम पाशा की दलील पर जजों ने तुरंत गोभी की चर्चा की और उनकी याचिका को मंजूरी दे दी।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच हेट स्पीच से जुड़ी एक पुरानी याचिका में एडवोकेट निजाम पाशा की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पाशा ने कोर्ट को बताया कि देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हेट स्पीच और आर्थिक बहिष्कार के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि फल और सब्जी मंडियों तक में अल्पसंख्यकों के बहिष्कार की अपील की जा रही है।

जस्टिस मेहता ने पाशा की दलीलों पर सवाल उठाते हुए अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि यह कोर्ट हर घटना पर नज़र नहीं रख सकता, अगर राज्य सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है, तो आपको हाई कोर्ट जाना चाहिए। जस्टिस मेहता ने पाशा से स्पष्ट कहा, “यह कोर्ट है, कोई पुलिस चौकी नहीं।” सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने भी इस पर अपनी बात रखी और कहा कि हेट स्पीच सभी धर्मों के खिलाफ हो रही है, यह सिर्फ एक धर्म का मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में सारी जानकारी दे सकते हैं।

जब कोर्ट पाशा की याचिका को स्वीकार करने में हिचकिचा रहा था और बार-बार उन्हें हाई कोर्ट जाने को कह रहा था, तभी पाशा ने हेट स्पीच के एक मामले का ज़िक्र करते हुए तुरंत बताया कि कैसे कुछ लोग अल्पसंख्यकों से गोभी नहीं खरीदने की अपील कर रहे हैं। इस सब्जी का ज़िक्र सुनते ही जस्टिस मेहता और जस्टिस नाथ ने फ़ौरन याचिका पर विचार करने की गंभीरता दिखाई और उसे मंजूरी दे दी। पाशा का कहना था कि राज्य सरकारें ऐसे मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही हैं, इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस गंभीर स्थिति को रोकने के लिए कुछ गाइडलाइंस (दिशा-निर्देश) बनाने की अपील की है। अब देखना होगा कि इस मामले में कोर्ट का आगे क्या रुख रहता है।

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