35 साल की राजनीति, 6 बार उपमुख्यमंत्री: अजित पवार का सियासी सफर

करीब 35 साल की राजनीति में अजित पवार ने सहकारिता से सफर शुरू कर 6 बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंच बनाई। बगावत, सत्ता और चुनावी उतार-चढ़ाव के बीच उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक ताकत साबित की।

BNT
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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का बारामती में प्लेन क्रैश में निधन हो गया। विमान दुर्घटना में 2 क्रू मेंबर, एक सहायक समेत 5 लोगों की मौत हो गई। अजित पवार के निधन की खबर से बारामती समेत पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई। निधन की खबर मिलते ही अजित पवार के करीबियों के आंसू छलक पड़े।

 

महाराष्ट्र की राजनीति का मजबूत स्तंभ

अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा “दोस्तों के दोस्त” माना गया। करीब 35 साल के राजनीतिक सफर में वह रिकॉर्ड 6 बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने। इस लंबे दौर में उनके साथ काम करने वाले नेताओं को उन्होंने हमेशा सपोर्ट किया और आगे बढ़ाने की कोशिश की। सत्ता में रहते हुए उनकी पहचान तेज़ फैसले लेने वाले और मजबूत पकड़ वाले नेता की रही।

 

सहकारिता से शुरू हुई राजनीति

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर के देवलाली प्रवरा में हुआ था। वह शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं। राजनीति में उन्होंने सहकारिता से कदम रखा। साल 1991 में वह पुणे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन बने। इसी साल वह पहली बार बारामती से सांसद चुने गए। इसके बाद 1995 से वह लगातार बारामती विधानसभा सीट से विधायक हैं और अब तक 7 बार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं।

 

मंत्री पद और अहम विभागों की जिम्मेदारी

अजित पवार 1991 से ही सरकार का हिस्सा बन गए थे। जून 1991 से नवंबर 1992 तक वह कृषि और बिजली राज्य मंत्री रहे। इसके बाद जल आपूर्ति, योजना, ग्रामीण विकास, सिंचाई, ऊर्जा और जल संसाधन जैसे अहम विभाग उनके पास रहे। 1999 से 2009 और फिर 2009 से 2010 तक उन्होंने सिंचाई, जल संसाधन और ऊर्जा मंत्रालय संभाला। इन विभागों में उनके फैसले लंबे समय तक चर्चा में रहे।

 

उपमुख्यमंत्री और बगावत का दौर

अजित पवार 2010 से 2014 तक दो बार उपमुख्यमंत्री बने और इसके बाद भी अलग-अलग सरकारों में यह पद संभाला। वह पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री रहे। 2019 में उन्होंने पहली बार चाचा शरद पवार से बगावत कर बीजेपी के साथ सरकार बनाई, लेकिन तीन दिन बाद इस्तीफा दे दिया। जुलाई 2023 में उन्होंने फिर विद्रोह किया, जिससे एनसीपी दो हिस्सों में बंट गई और वह बीजेपी-शिंदे सरकार में शामिल हो गए।

 

चुनावी परीक्षा और निजी जीवन

2024 के लोकसभा चुनाव में अजित पवार गुट सिर्फ एक सीट जीत सका, लेकिन विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी ताकत दिखाई। महायुति गठबंधन को 41 सीटें मिलीं और अजित पवार ने साबित किया कि वह अपने दम पर भी जनता का समर्थन जुटा सकते हैं। अजित पवार की शादी पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटील की बेटी सुनेत्रा पवार से हुई है। उनके दो बेटे हैं—जय पवार और पार्थ पवार। पार्थ ने 2019 में मावल से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

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