महाराष्ट्र की राजनीति में ‘अजित दादा’ के नाम से मशहूर उपमुख्यमंत्री अजित पवार अब हमारे बीच नहीं रहे। बुधवार सुबह एक बेहद दर्दनाक विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। यह नियति का क्रूर खेल ही है कि जिस बारामती की धरती ने अजित पवार को राजनीतिक पहचान दी और जहां से उन्होंने अपने करियर का पहला कदम रखा, उसी मिट्टी पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
हादसा बुधवार सुबह करीब 9 बजे हुआ, जब अजित पवार अपने निजी विमान ‘लीयरजेट 45’ से बारामती जा रहे थे। जानकारी के अनुसार, विमान मुंबई से सुबह 8:10 बजे उड़ा था। बारामती हवाई पट्टी पर लैंडिंग की कोशिश के दौरान पायलट ने नियंत्रण खो दिया और विमान क्रैश हो गया। विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें अजित पवार के साथ उनके पीएसओ, एक परिचारक और दो पायलट शामिल थे। डीजीसीए ने पुष्टि की है कि हादसे के बाद विमान में भीषण आग लग गई थी, जिससे किसी को बचने का मौका नहीं मिला।
बारामती: वो कर्मभूमि जहां से शुरू हुआ सियासी सफर
अजित पवार के लिए बारामती सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि उनका घर और उनकी ताकत थी। उन्होंने 1982 में इसी बारामती से सहकारी चीनी मिल के जरिए अपनी राजनीति शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह बारामती से लगातार 8 बार (1991, 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और हाल ही में 2024) विधायक चुने गए। पिछले 30 सालों से बारामती का मतलब ही अजित पवार बन चुका था। आज जब वे जिला परिषद चुनावों की तैयारी के लिए वहां जा रहे थे, तभी यह हादसा हो गया।
विकास पुरुष के रूप में हमेशा याद आएंगे ‘दादा’
अजित पवार को उनके सख्त अनुशासन और विकास कार्यों के लिए जाना जाता था। उन्होंने बारामती को एक आधुनिक शहर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। बारामती की सड़कों से लेकर वहां के शिक्षण संस्थानों तक, हर जगह उनकी मेहनत की छाप दिखती है। महाराष्ट्र सरकार ने इस दुखद घड़ी में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। एक दिग्गज नेता का इस तरह जाना महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे भरना नामुमकिन है।