BNT Desk: बिहार के भागलपुर से ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। यहाँ एक दंपत्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर बदमाशों ने 18.70 लाख रुपये लूट लिए। ठगों ने इतना खौफ पैदा कर दिया था कि पति-पत्नी अपने ही घर में कैद होने को मजबूर हो गए। हालांकि, भागलपुर साइबर पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए समस्तीपुर से एक आरोपी अविनाश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जिसके पास से कई एटीएम कार्ड और कैश बरामद हुआ है।
कैसे शुरू हुआ डर का ये खेल?
ठगी की शुरुआत 4 जनवरी को एक अनजान कॉल से हुई। कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली रत्ना गुप्ता के पास फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को ‘नेशनल सीक्रेट डिपार्टमेंट’ का अफसर बताया। उसने रत्ना और उनके पति संजय पर मनी लॉन्ड्रिंग (पैसों की हेरफेर) का झूठा आरोप लगाया। ठग ने दावा किया कि उसके पास उनकी रिकॉर्डिंग है और वे मुंबई पुलिस के रडार पर हैं। इसके बाद शुरू हुआ उन्हें डराने और ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने का सिलसिला।
बच्चों की जान का डर दिखाकर वसूले लाखों
हैरानी की बात यह है कि ठगों ने न सिर्फ गिरफ्तारी की धमकी दी, बल्कि यह भी कहा कि “2 मिनट लगेंगे, तुम्हारे बेटा-बेटी को घर से उठवा लेंगे।” डर के मारे दंपत्ति ने 5 और 6 जनवरी को दो बार में कुल 18 लाख 70 हजार रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। बदमाशों ने उनसे व्हाट्सएप पर जबरन बॉन्ड साइन करवाया और आधार कार्ड भी ले लिया। हालत यह थी कि वाई-फाई ऑन होते ही ठगों का वीडियो कॉल आ जाता था, जिससे बचने के लिए पीड़ितों ने इंटरनेट तक बंद कर दिया था।
पुलिस की कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी
जब मामला पुलिस के पास पहुँचा, तो एसएसपी प्रमोद कुमार के निर्देश पर एक स्पेशल टीम बनाई गई। साइबर डीएसपी कनिष्क श्रीवास्तव की लीडरशिप में पुलिस ने छापेमारी की और मुख्य आरोपी अविनाश को धर दबोचा। आरोपी के पास से 15 हजार रुपये नगद और मोबाइल फोन मिला है। पूछताछ में पता चला है कि यह एक बड़ा गैंग है जो कई राज्यों में फैला हुआ है। पुलिस अब गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी है ताकि आम जनता की गाढ़ी कमाई को बचाया जा सके।