बिहार में 55 करोड़ का बड़ा फ्रॉड: ATM में ग्लू और गेमिंग ऐप के जरिए लोगों को लगाया चूना, 13 गिरफ्तार

पटना पुलिस ने करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के 13 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग एटीएम मशीनों में गोंद लगाकर और गेमिंग ऐप्स के जरिए लोगों को चूना लगाता था। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में एटीएम कार्ड और मोबाइल बरामद किए हैं।

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BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना में पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसने अपनी चालाकी से करोड़ों रुपये की ठगी की है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस गैंग ने ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और एटीएम मशीनों में ग्लू (गोंद) लगाकर करीब 55 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन किया है। एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों से भी जुड़े हुए हैं, जिसके लिए अब केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में जुट गई हैं।

कैसे खुला ठगी का ये बड़ा राज?

इस पूरे खेल का खुलासा एक अपहरण के मामले से हुआ। दरअसल, 1 जुलाई को इस गैंग ने भोजपुरी लेखक अशोक कुमार का अपहरण कर लिया था। बदमाशों ने उन्हें बेरहमी से पीटा और उनसे 9 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए। इसी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का पीछा करते हुए गर्दनीबाग पुलिस बदमाशों तक जा पहुँची। जब पुलिस ने जांच की कड़ियाँ जोड़ीं, तो पता चला कि यह सिर्फ एक मामूली लूट नहीं बल्कि करोड़ों का साइबर फ्रॉड है। पुलिस ने इनके पास से 55 एटीएम कार्ड, 23 मोबाइल और 28 चेकबुक बरामद की हैं।

कौन है इस गिरोह का मास्टरमाइंड?

इस बड़े नेटवर्क का मास्टरमाइंड बेतिया का रहने वाला सौरभ द्विवेदी है। सौरभ पहले सूरत की एक निजी कंपनी में नौकरी करता था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान घर लौटने के बाद उसने शॉर्टकट से पैसे कमाने के लिए जालसाजी का रास्ता चुना। उसने पटना के एक कंप्यूटर इंजीनियर सत्यम और कुछ बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर यह पूरा गैंग तैयार किया। ये बैंक एजेंट फर्जी खाते खुलवाते थे और उन खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसों को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था। गिरोह ने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेशों में भी पैसे भेजे हैं।

ठगी करने का अनोखा तरीका

इस गैंग के काम करने का तरीका बेहद शातिर था। ये लोग एटीएम मशीन में जहाँ से पैसे निकलते हैं, वहाँ चुपके से ग्लू (गोंद) लगा देते थे। जब कोई व्यक्ति पैसे निकालने आता, तो मशीन से कैश बाहर नहीं आ पाता था। ऐसे में गिरोह का एक सदस्य मदद के बहाने वहां पहुँचता और बातों-बातों में यूजर का पिन कोड देख लेता था। जैसे ही व्यक्ति परेशान होकर वहां से जाता, ये लोग मशीन से पैसे निकाल लेते या ऑनलाइन तरीके से खाते को साफ कर देते थे। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

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