BNT Desk: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन बेगूसराय से आई एक खबर ने न केवल कानून व्यवस्था बल्कि बच्चों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिया है। बछवाड़ा थाना क्षेत्र के शिशवा प्राथमिक विद्यालय में जो हुआ, उसने मानवता और प्रशासनिक चौकसी दोनों को शर्मसार कर दिया है। यहाँ एक मासूम बच्चे ने स्कूल परिसर में रखी शराब को गलती से कोल्ड ड्रिंक समझ लिया और उसे पी गया, जिससे उसकी जान पर बन आई।
मासूम की जान से खिलवाड़: कोल्ड ड्रिंक समझकर पी लिया ‘जहर’
घटना सोमवार दोपहर की है। चौथी कक्षा में पढ़ने वाला एक छात्र स्कूल में खेल रहा था। इसी दौरान उसकी नजर वहां रखी एक बोतल पर पड़ी। अबोध बालक ने उसे कोल्ड ड्रिंक समझा और गटक गया। कुछ ही देर में बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी और वह बेसुध होने लगा। जब शिक्षकों ने उसे संभाला, तो उसके मुंह से शराब की तीखी गंध आ रही थी, जिससे पूरे स्कूल में हड़कंप मच गया।
स्कूल का शौचालय बना ‘शराब का गोदाम’
जब शिक्षकों और ग्रामीणों ने स्कूल परिसर की तलाशी ली, तो जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था। स्कूल के एक पुराने और जर्जर शौचालय का इस्तेमाल शराब माफिया अवैध गोदाम के रूप में कर रहे थे।
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बरामदगी: सूचना पर पहुंची बछवाड़ा थाना पुलिस ने शौचालय से करीब 12 कार्टन विदेशी शराब बरामद की।
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साजिश: माफिया ने सोचा था कि स्कूल जैसी जगह पर पुलिस कभी तलाशी नहीं लेगी, इसलिए इसे सबसे सुरक्षित ठिकाना बनाया गया था।
प्रधानाध्यापक और ग्रामीणों का बयान
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मो. मुरसलीन ने बताया कि वे स्कूल की छुट्टी के बाद घर जा चुके थे। बाद में ग्रामीणों के जरिए उन्हें इस घटना की जानकारी मिली। जैसे ही पता चला कि शौचालय में शराब का जखीरा है और एक छात्र बीमार हो गया है, वे तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचित किया। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि शिक्षा के मंदिर को नशे के कारोबार का केंद्र बनाया गया।
पुलिस की कार्रवाई और ‘प्रशासनिक मिलीभगत’ के आरोप
सूचना मिलते ही पुलिस ने शराब को जब्त कर लिया और अज्ञात शराब कारोबारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस तरह का बड़ा अवैध कारोबार पुलिस और माफिया की साठगांठ के बिना संभव नहीं है।
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गंभीर सवाल: क्या चौकीदार या स्थानीय बीट पुलिस को स्कूल में होने वाली इन गतिविधियों की खबर नहीं थी?
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जांच: पुलिस अब उन स्थानीय तस्करों की पहचान करने में जुटी है जो सरकारी भवन का दुरुपयोग कर रहे थे।
अस्पताल में भर्ती बच्चा, हालत अब स्थिर
शराब पीने के बाद बच्चे की हालत काफी गंभीर हो गई थी। परिजनों ने आनन-फानन में उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे की स्थिति को संभाला है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर बच्चे ने थोड़ी और ज्यादा मात्रा में शराब पी ली होती या इलाज में देरी होती, तो नतीजा और भी बुरा हो सकता था। फिलहाल बच्चा खतरे से बाहर है, लेकिन सदमे में है।
शराबबंदी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मोतिहारी में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद पूरे बिहार में पुलिस अलर्ट पर होने का दावा कर रही है। बेगूसराय की यह घटना साबित करती है कि:
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शराब माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें अब स्कूल-कॉलेजों का भी डर नहीं रहा।
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बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल प्रशासन और स्थानीय पुलिस बेहद लापरवाह हैं।
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ग्रामीण इलाकों में सरकारी भवनों की निगरानी का कोई पुख्ता तंत्र नहीं है।