AI ने खोल दिया रजिस्ट्री घोटाले का राज, बिहार में 31 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी गई

बिहार में जमीन रजिस्ट्री के दौरान करोड़ों की टैक्स चोरी का बड़ा खुलासा हुआ है। पहली बार AI तकनीक का इस्तेमाल कर सरकार ने करीब 31 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पकड़ी है। निबंधन विभाग ने 838 संदिग्ध दस्तावेजों की पहचान कर जमीन मालिकों से बकाया वसूली और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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BNT Desk: बिहार में अब जमीन और मकान की रजिस्ट्री में हेराफेरी करना भारी पड़ने वाला है। राज्य सरकार ने पहली बार AI का इस्तेमाल करके एक बड़े टैक्स घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस तकनीक की मदद से सरकार ने कई जिलों में करीब 31 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी है। निबंधन विभाग ने अब इन सभी जमीन मालिकों से पैसा वसूलने का कड़ा आदेश जारी कर दिया है।

कैसे हुआ इस बड़े खेल का खुलासा?

दरअसल, पिछले 3 महीनों से विभाग AI तकनीक के जरिए पुराने दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहा था। इस जांच में सामने आया कि जमीन और मकान की रजिस्ट्री के समय उनके असली मूल्य को कम करके दिखाया गया था, ताकि स्टांप ड्यूटी और टैक्स बचाया जा सके। विभाग के सचिव अजय यादव ने बताया कि अब तक कुल 838 ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनमें गड़बड़ी की गई है। इस खुलासे के बाद पूरे निबंधन कार्यालयों में हड़कंप मच गया है।

लापरवाह अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव ने विभाग के कर्मियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे उन सभी जमीन मालिकों को नोटिस भेजें और उनसे बकाया राशि वसूल करें। अगर कोई मालिक पैसा जमा नहीं करता है, तो उसकी जमीन की नीलामी की जाएगी या उन पर कानूनी केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की जाएगी।

जमीन की कीमतों में होने वाली है भारी बढ़ोतरी

बिहार में इस साल राजस्व वसूली का लक्ष्य भी पिछड़ रहा है, जिसे देखते हुए अब विभाग काफी सख्त हो गया है। अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे आवेदन मिलने के 3 दिनों के भीतर जमीन का मौका-मुआयना (Site Inspection) करें। वहीं, आम जनता के लिए एक और बड़ी खबर यह है कि नए वित्तीय वर्ष से पहले नई MVR दरें लागू होने वाली हैं, जिससे बिहार में जमीन की कीमतें 2 से 4 गुना तक बढ़ सकती हैं।

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