पश्चिमी चंपारण में 20 साल का फर्जीवाड़ा उजागर, बड़ी बहन छोटी बहन के नाम पर करती रही शिक्षिका की नौकरी

पश्चिमी चंपारण में मुन्नी गुप्ता नामक महिला अपनी छोटी बहन अनीता के सर्टिफिकेट पर 20 साल से शिक्षिका की नौकरी कर रही थी। सगी बहन की शिकायत और ग्रामीणों की गवाही के बाद यह राज खुला। अब मुन्नी के खिलाफ केस दर्ज कर वेतन वसूली और गिरफ्तारी की तैयारी शुरू हो गई है।

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BNT Desk: बिहार के पश्चिमी चंपारण से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। यहाँ एक बड़ी बहन अपनी छोटी बहन के नाम और सर्टिफिकेट पर पिछले 20 साल से शिक्षिका की नौकरी कर रही थी। विभाग को कानों-कान खबर तक नहीं थी कि स्कूल में पढ़ाने वाली ‘अनीता’ असल में ‘मुन्नी’ है। इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब खुद सगी छोटी बहन अनीता ने शिक्षा विभाग और लोक शिकायत निवारण में अपनी बड़ी बहन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

कैसे हुआ 20 साल पुराने झूठ का खुलासा?

मामला भितहा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर-1 का है, जहाँ कुमारी मुन्नी गुप्ता प्रधान शिक्षिका के पद पर तैनात थीं। जांच के दौरान जब पुलिस उत्तर प्रदेश के कुशीनगर स्थित उनके पैतृक गाँव पहुंची, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। ग्रामीणों और ग्राम प्रधान की मौजूदगी में हुई बैठक में यह साफ हो गया कि जो महिला स्कूल में ‘अनीता’ बनकर पढ़ा रही है, वह असल में मुन्नी है। ग्रामीणों की गवाही ने 20 साल से चल रहे इस बड़े झूठ की नींव हिला दी।

अब तक क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

शिकायत सही पाए जाने के बाद भितहा थाने में मुन्नी गुप्ता के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। हालांकि, शिक्षा विभाग ने उन्हें पद से हटा तो दिया है, लेकिन अभी तक सस्पेंड (निलंबन) नहीं किया गया है। विभाग की इस सुस्ती पर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने सालों तक पहचान का वेरिफिकेशन क्यों नहीं हुआ? किसकी लापरवाही से सरकारी खजाने का पैसा एक फर्जी पहचान वाली महिला को मिलता रहा?

होगी जेल और वसूला जाएगा वेतन

पुलिस का कहना है कि अब जालसाजी के सारे सबूत मिल चुके हैं और जल्द ही मुन्नी गुप्ता की गिरफ्तारी की जाएगी। सिर्फ इतना ही नहीं, सरकार अब पिछले 20 सालों में दिए गए वेतन की वसूली करने की भी तैयारी कर रही है। यह मामला दिखाता है कि कैसे सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर लोग दशकों तक सरकारी तंत्र को धोखा देते रहते हैं।

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