BNT Desk: रोहतास जिले का डालमियानगर एक समय में अपनी चीनी मिलों और कागज कारखानों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर था। 1984 में इसके बंद होने के बाद से यहाँ सन्नाटा पसरा हुआ था। अब भारतीय रेलवे के डीडीयू (DDU) रेल मंडल और राइट्स (RITES) ने मिलकर यहाँ रेल वैगन मरम्मत कारखाने के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इस फैक्ट्री के बनने से न केवल रेलवे की आधारभूत संरचना मजबूत होगी, बल्कि बिहार के औद्योगिक नक्शे पर रोहतास फिर से चमक उठेगा।
परियोजना की लागत और विस्तार: 219 एकड़ में फैलेगा वर्कशॉप
यह परियोजना कोई छोटी-मोटी पहल नहीं है, बल्कि एक विशाल औद्योगिक परिसर है:
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अनुमानित लागत: इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 403.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
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जमीन का क्षेत्रफल: इसे 219 एकड़ की विशाल भूमि पर विकसित किया जाएगा।
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बजट का प्रावधान: रेल बजट 2026-27 में इस परियोजना के लिए विशेष रूप से राशि आवंटित की गई थी, जिससे काम की गति में तेजी आई है।
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समय सीमा: डीडीयू रेल मंडल के अधिकारियों का कहना है कि काम को निर्धारित समय के भीतर ही पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रोजगार का महाकुंभ: युवाओं के लिए खुलेंगे प्रगति के द्वार
इस फैक्ट्री का सबसे बड़ा फायदा बिहार के युवाओं को होगा। डीडीयू रेल मंडल के डीआरएम (DRM) के अनुसार, यह कारखाना रोजगार का एक बहुत बड़ा केंद्र बनेगा। यहाँ हजारों की संख्या में कुशल और अकुशल श्रमिकों की आवश्यकता होगी।
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प्रत्यक्ष रोजगार: फैक्ट्री के संचालन के लिए रेलवे में तकनीकी पदों पर बहाली होगी।
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अप्रत्यक्ष रोजगार: फैक्ट्री के आसपास के इलाकों में लॉजिस्टिक्स, कैंटीन, और परिवहन जैसे क्षेत्रों में हजारों लोगों को काम मिलेगा।
व्यापारियों और छोटे उद्योगों को मिलेगी संजीवनी
रेल फैक्ट्री केवल वैगन मरम्मत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह अपने साथ सहायक उद्योगों (Ancillary Industries) का एक पूरा जाल लेकर आएगी। इससे जिले की इकोनॉमी को जबरदस्त बूस्ट मिलेगा:
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स्थानीय उद्योगों का विकास: फैक्ट्री की जरूरतों को पूरा करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में वेल्डिंग यूनिट्स, स्पेयर पार्ट्स निर्माण, और पेंटिंग जैसे छोटे-बड़े उद्योग स्थापित होंगे।
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व्यापारिक उत्साह: स्थानीय व्यापारियों के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर भारी उत्साह है, क्योंकि बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और नए व्यापारिक अवसर पैदा होंगे।
1984 से अब तक: एक लंबी प्रतीक्षा का अंत
डालमियानगर के कारखानों का बंद होना बिहार के औद्योगिक पतन का एक बड़ा अध्याय था।
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इतिहास: 1984 में कारखाना बंद होने के बाद 2007 में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
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शिलान्यास: 2009 में इसका औपचारिक शिलान्यास भी किया गया था, लेकिन विभिन्न तकनीकी और राजनीतिक कारणों से काम अधर में लटका रहा।
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नया सवेरा: अब 2026 में, पुरानी बाधाओं को दूर कर काम को युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।
आधुनिक कनेक्टिविटी: फ्लाईओवर और नया रेलवे ट्रैक
वैगनों को वर्कशॉप तक लाने के लिए रेलवे ने एक खास इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान तैयार किया है। पहलेजा रेलवे स्टेशन से कारखाने तक एक नया रेलवे फ्लाईओवर और विशेष ट्रैक बनाया जाएगा। इससे मेन लाइन के ट्रैफिक को प्रभावित किए बिना खराब वैगनों को सीधे मरम्मत के लिए वर्कशॉप तक लाया जा सकेगा।
रोहतास की बदलती तस्वीर
डालमियानगर रेल वैगन कारखाना बिहार के लिए सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि उम्मीदों की एक नई किरण है। 403 करोड़ का यह निवेश रोहतास को फिर से बिहार का ‘औद्योगिक हब’ बनाने की क्षमता रखता है। अगर यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा होता है, तो यह राज्य से पलायन रोकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
रोहतास की जनता अब उस दिन का इंतजार कर रही है जब इस कारखाने से मरम्मत होकर पहला रेल वैगन पटरी पर दौड़ेगा।