सक्षमता परीक्षा के चौथे चरण का रिजल्ट जारी, केवल 33% शिक्षक हुए पास

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने चौथे चरण की सक्षमता परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस बार कुल 14,936 शिक्षकों में से केवल 4,932 सफल हुए, जिससे पास प्रतिशत महज 33.02% रहा। सफल शिक्षकों को काउंसलिंग के बाद अब जल्द ही राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाएगा।

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BNT Desk: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने शनिवार, 20 दिसंबर 2025 को ‘सक्षमता परीक्षा (चतुर्थ)’ का रिजल्ट घोषित कर दिया है। बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर द्वारा जारी किए गए इन नतीजों में इस बार पास होने वाले शिक्षकों की संख्या काफी कम रही। परीक्षा में शामिल हुए कुल 14,936 शिक्षकों में से केवल 4,932 शिक्षक ही सफलता हासिल कर पाए हैं। इस तरह इस बार का कुल पास प्रतिशत महज 33.02% रहा, जिसने सबको हैरान कर दिया है।

किस कक्षा में कितने शिक्षक हुए सफल?

इस परीक्षा में प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक तक के शिक्षकों ने हिस्सा लिया था। आंकड़ों पर नज़र डालें तो कक्षा 1 से 5 (प्राइमरी) में सबसे ज्यादा 13,726 शिक्षक बैठे थे, जिनमें से 4,182 पास हुए। वहीं, कक्षा 6 से 8 में 387 में से 266, कक्षा 9 से 10 में 592 में से 354 और कक्षा 11-12 में 231 शिक्षकों में से केवल 130 शिक्षक ही उत्तीर्ण हो सके। पुरुषों के मुकाबले इस बार महिला शिक्षकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था, जिसमें 2,725 महिलाएं और 2,207 पुरुष सफल रहे।

पास होने के लिए क्या था नियम और कटऑफ?

यह परीक्षा पटना के ऑनलाइन केंद्रों पर ढाई घंटे की अवधि के लिए आयोजित की गई थी। राज्यकर्मी का दर्जा पाने के लिए सामान्य वर्ग के शिक्षकों को कम से कम 40% अंक लाने थे। वहीं पिछड़ा वर्ग के लिए 36.5%, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 34% और एससी-एसटी, महिला व दिव्यांगों के लिए 32% अंक पासिंग मार्क्स तय किए गए थे। जो शिक्षक इन अंकों तक नहीं पहुँच पाए, उनके लिए यह परिणाम निराशाजनक रहा।

आगे की प्रक्रिया: काउंसलिंग और राज्यकर्मी का दर्जा

बोर्ड ने साफ किया है कि यह रिजल्ट अभी अस्थायी (provisional) है। सफल हुए सभी 4,932 शिक्षकों को अब शिक्षा विभाग की काउंसलिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। काउंसलिंग की तारीखों की जानकारी विभाग जल्द ही देगा। बता दें कि अब तक हुई चारों चरणों की सक्षमता परीक्षाओं को मिलाकर राज्य में कुल 2.66 लाख से अधिक शिक्षक सफल हो चुके हैं। इन परीक्षाओं का मुख्य उद्देश्य स्थानीय निकाय के शिक्षकों को सरकारी सुविधाओं के साथ ‘राज्यकर्मी’ का दर्जा देना है।

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