BNT Desk: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े हमलों के बाद वैश्विक बाजारों में घबराहट का माहौल रहा, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स खुलते ही करीब 1,100 अंकों की गिरावट के साथ नीचे आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 लगभग 330 अंक टूटकर कारोबार करता दिखा।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव
सिर्फ बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स अपने पिछले बंद 59,115.60 के मुकाबले गिरकर 57,090.80 पर खुला। इसी तरह निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी अपने पिछले स्तर 16,928.90 से फिसलकर 16,289.60 पर खुला। यह गिरावट दिखाती है कि बाजार में व्यापक स्तर पर दबाव बना हुआ है।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई। रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी दिखी। सिग्नेचर ग्लोबल, गोदरेज प्रॉपर्टीज और लोढ़ा डेवलपर्स जैसी कंपनियों के शेयरों में शुरुआती कारोबार में गिरावट रही। रियल्टी के बाद मीडिया और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी दबाव देखा गया। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए इन सेक्टरों में बिकवाली की।
वैश्विक तनाव का असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
ऐसे माहौल में निवेशकों को घबराने के बजाय सोच-समझकर फैसले लेने की सलाह दी जा रही है। बाजार में गिरावट के दौरान मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के लिए निवेश के अवसर भी बन सकते हैं। हालांकि, फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, इसलिए सतर्कता जरूरी है।