स्मार्टफोन की दुनिया में बड़ा धमाका! ग्लोबल मार्केट से विदा होगा OnePlus? भारत और चीन पर टिकेंगी नजरें; जानें क्या है पूरा मामला

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BNT Desk: टेक जगत में पिछले कुछ घंटों से हलचल तेज है। इंटरनेट टिपस्टर योगेश बरार के एक (अब डिलीट किए जा चुके) पोस्ट और 9to5Google की रिपोर्ट के मुताबिक, ¸अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने स्मार्टफोन ऑपरेशंस को बंद करने की योजना बना रहा है। यह खबर उन लाखों प्रशंसकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है, जो वनप्लस के ‘नेवर सेटल’ (Never Settle) विजन के दीवाने रहे हैं।

यूरोप से शुरुआत: अप्रैल 2026 तक हो सकती है विदाई

सूत्रों के हवाले से खबर है कि वनप्लस यूरोप के बड़े हिस्सों में अपनी सेवाएं बंद कर सकता है। संभावित रूप से अप्रैल 2026 तक कंपनी इन क्षेत्रों से अपना बोरिया-बिस्तर समेट सकती है। बताया जा रहा है कि चुनिंदा कर्मचारियों को इस फैसले के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया है और कई को ‘सेवरेंस पैकेज’ (नौकरी छोड़ने पर मिलने वाली राशि) भी दी जा चुकी है।

भारत में बदल जाएगी रणनीति: अब बजट और मिड-रेंज पर फोकस

भारत वनप्लस के लिए हमेशा से एक महत्वपूर्ण बाजार रहा है। खबर है कि वैश्विक कारोबार समेटने के बाद कंपनी भारत में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करेगी। अब वनप्लस यहाँ प्रीमियम फ्लैगशिप के बजाय एंट्री-लेवल और मिड-रेंज सेगमेंट पर ज्यादा ध्यान देगी।

इस चर्चा को तब और हवा मिली जब वनप्लस इंडिया के सीईओ रोबिन लियू के पद छोड़ने और चीन वापस लौटने की पुष्टि हुई। उनके अचानक जाने को कंपनी के पुनर्गठन और वैश्विक स्तर पर घटते कद से जोड़कर देखा जा रहा है।

Oppo के साथ बढ़ती नजदीकी और Hasselblad का अंत

पिछले कुछ वर्षों में वनप्लस और उसकी पैरेंट कंपनी Oppo के बीच दूरियां लगभग खत्म हो गई हैं। वनप्लस के सह-संस्थापक कार्ल पेई के जाने के बाद से ही कंपनी ओप्पो के करीब आती गई। यहाँ तक कि वनप्लस के मुखिया पीट लाउ अब ओप्पो में चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर की भूमिका निभा रहे हैं।

इस बदलाव का असर हालिया लॉन्च पर भी दिखा। मशहूर कैमरा ब्रांड Hasselblad के साथ वनप्लस की साझेदारी OnePlus 15 के साथ ही खत्म हो गई, जबकि ओप्पो के फ्लैगशिप फोन में यह अब भी जारी है। माना जा रहा है कि ओप्पो अब खुद को प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित कर रहा है और वनप्लस को एक ‘बजट सब-ब्रांड’ के रूप में ढालने की कोशिश में है।

क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?

इस बड़े फैसले के पीछे कई ठोस कारण माने जा रहे हैं:

  1. बढ़ती लागत: स्मार्टफोन के पुर्जों (मेमोरी और स्टोरेज) की भारी कमी और बढ़ती कीमतों ने चीनी ब्रांड्स पर दबाव बढ़ा दिया है।

  2. बाजार की स्थिति: ग्लोबल मार्केट में घटते मुनाफे के कारण कंपनियां अब अपने खर्चों में कटौती (Trim excess) कर रही हैं।

  3. ओप्पो की नई रणनीति: रियलमी (Realme) के ओप्पो के अंतर्गत आने के बाद, अब वनप्लस को भी इसी छाते के नीचे एक किफायती ब्रांड बनाने की तैयारी है।

मौजूदा यूजर्स का क्या होगा?

वनप्लस के उन करोड़ों ग्राहकों के मन में डर है जिनके पास पहले से ही कंपनी के फोन हैं। हालांकि, कंपनी ने पहले भी ऐसे संकेतों पर प्रतिक्रिया देते हुए आश्वासन दिया था कि वह अपने यूजर्स को सॉफ्टवेयर अपडेट, आफ्टर-सेल्स सपोर्ट और वारंटी की पूरी गारंटी देगी। लेकिन आने वाले समय में नए मॉडल्स का ग्लोबल लॉन्च होना मुश्किल लग रहा है। कई पाइपलाइन प्रॉडक्ट्स अब केवल चीन तक ही सीमित रह सकते हैं।

एक युग का अंत?

कभी ‘फ्लैगशिप किलर’ के नाम से मशहूर हुआ वनप्लस अब अपनी पहचान बदलने की दहलीज पर खड़ा है। अगर यह खबरें हकीकत में बदलती हैं, तो प्रीमियम स्मार्टफोन मार्केट में एक बड़े युग का अंत हो जाएगा और उपभोक्ताओं के पास विकल्पों की कमी हो सकती है।

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