न्यू लेबर कोड: आज की थोड़ी कमी, कल की पूरी सुरक्षा!

नए लेबर कोड से इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है क्योंकि PF बढ़ेगा, लेकिन रिटायरमेंट सुरक्षा मजबूत होगी। पहली बार गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता मिली है, उन्हें PF, पेंशन, बीमा और स्वास्थ्य लाभ मिलेंगे। न्यूनतम वेतन, समय पर भुगतान और सामाजिक सुरक्षा कोष से लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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BNT, Desk: नए लेबर कोड में बुढ़ापे की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों की भविष्य की वित्तीय सुरक्षा मजबूत होगी। शुरुआत में आपकी इन-हैंड सैलरी कम लग सकती है, क्योंकि PF की कटौती बढ़ जाएगी। इससे बच्चों की फीस, किराया और EMI जैसी चीज़ों का मैनेज करना थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लेकिन यह कमी लंबी अवधि में आपके रिटायरमेंट की सुरक्षा बनकर लौटेगी।

पहले कंपनियां अपने कर्मचारियों की CTC (Cost to Company) के हिसाब से वेतन तय करती थीं। इसमें बेसिक सैलरी आम तौर पर 30-35% होती थी और बाकी HRA, स्पेशल अलाउंस और ट्रैवल अलाउंस में बंटती थी। नए नियमों के अनुसार, बेसिक + DA कुल वेतन का कम से कम 50% होना चाहिए। इसका फायदा यह है कि PF, ग्रेच्युटी और NPS जैसे रिटायरमेंट लाभ बढ़ जाएंगे।

नए कानून से गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार कानूनी मान्यता मिली है। अब वे बीमा, PF और पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। नए नियम न्यूनतम वेतन, समय पर वेतन भुगतान और ऑफर लेटर की सुविधा सभी श्रमिकों के लिए अनिवार्य करते हैं। इससे डिलीवरी पार्टनर्स और गिग वर्कर्स की आय में स्थिरता आएगी।

स्वास्थ्य कवरेज में सुधार हुआ है। अब गिग वर्कर्स ईएसआई कवरेज के साथ फ्री सालाना हेल्थ चेकअप का लाभ भी ले सकते हैं। महिलाओं को अलग-अलग भूमिकाओं और नाइट शिफ्ट में काम करने के लिए बेहतर सुरक्षा और अवसर मिलेंगे।

इसके अलावा, गिग वर्कर्स के लिए एक नया वेलफेयर मॉडल भी पेश किया गया है। इसमें प्लेटफॉर्म कंपनियां अपने टर्नओवर का 1-2% सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान देंगी। यह फंड लाखों वर्कर्स के लिए बीमा, पेंशन और दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करेगा।

नए लेबर कोड से शुरुआती कमी के बावजूद भविष्य में रिटायरमेंट और सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी।

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