BNT Desk: बिहार के वैशाली से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पुलिस और एसटीएफ (STF) की टीम ने एक संयुक्त कार्रवाई में कुख्यात अपराधी प्रिंस उर्फ अभिजीत कुमार को मार गिराया है। प्रिंस उस गैंग का मुख्य सदस्य था, जिसने देश के 7 राज्यों में करीब 300 किलो से ज्यादा सोना लूटकर सनसनी फैला दी थी। शुक्रवार को वैशाली के हनुमान नगर कॉलोनी में हुई इस मुठभेड़ ने एक बड़े अपराधी के आतंक का अंत कर दिया है।
कैसे हुआ एनकाउंटर?
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि प्रिंस वैशाली के सदर थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही बिहार एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी। पुलिस ने प्रिंस को सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन उसने खुद को घिरा देख पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। बचाव में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं, जिसमें प्रिंस मौके पर ही ढेर हो गया।
पुलिस को ‘मटन पार्टी’ देकर हुआ था फरार
प्रिंस का इतिहास किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। वह पिछले साल 4 सितंबर को पटना के PMCH अस्पताल से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। बताया जाता है कि भागने से पहले उसने पुलिसकर्मियों को मरीन ड्राइव की सैर कराई और फिर उन्हें ‘मटन पार्टी’ दी। जब पुलिसवाले खाने में व्यस्त थे, तब उसने उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया और हथकड़ी समेत फरार हो गया। इस लापरवाही के लिए कई पुलिसकर्मियों पर गाज भी गिरी थी।
हवलदार की हत्या और बड़ी लूट का मास्टरमाइंड
प्रिंस सिर्फ एक लुटेरा नहीं बल्कि एक बेरहम हत्यारा भी था। 2018 में जब उसे कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया जा रहा था, तब उसने अपने साथियों के साथ मिलकर हवलदार राम इकबाल रविदास की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वह कुख्यात सुबोध सिंह गैंग का ‘राइट हैंड’ माना जाता था। जेल से भागने के बाद उसने पंजाब में भी एक बड़ी सोना लूट की घटना को अंजाम दिया था, जिसके बाद से कई राज्यों की पुलिस उसके पीछे हाथ धोकर पड़ी थी।
क्यों था प्रिंस का खात्मा जरूरी?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रिंस के बाहर रहने से देश में फिर से किसी बड़ी लूट की साजिश रची जा रही थी। उसके नेपाल भागने की भी आशंका थी, जहाँ से वह अपना नेटवर्क चला सकता था। उस पर करीब 28 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज थे। इस एनकाउंटर के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है और इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है।