डबल फायदे का आरोप: उपेंद्र कुशवाहा ने पेंशन विवाद पर दी सफाई, बताया- 'सिर्फ वेतन लिया'

RTI से हुए खुलासे के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने पेंशन विवाद पर सफाई दी। उन्होंने आरोपों को 'बेबुनियाद' बताते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ तब पेंशन ली जब वह किसी सदन के सदस्य नहीं थे। कुशवाहा ने नियमों का पालन करने का दावा किया, जिसके अनुसार एक साथ वेतन और पेंशन नहीं ली जा सकती।

BNT
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हाल ही में सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पता चला है कि बिहार के कई ऐसे बड़े नेता हैं जो सांसद होने के बावजूद बिहार सरकार से पूर्व सदस्य के तौर पर पेंशन ले रहे हैं। इस लिस्ट में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) चीफ उपेंद्र कुशवाहा का नाम भी शामिल है, जो फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं। इस खुलासे के बाद सवाल उठने लगे थे कि क्या ये नेता एक साथ वेतन और पेंशन दोनों का फायदा ले रहे हैं? इस लिस्ट में उपेंद्र कुशवाहा के अलावा केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे, बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, देवेश चंद्र ठाकुर, ललन कुमार सर्राफ, नितीश मिश्रा और संजय सिंह समेत 8 नेताओं के नाम हैं।

कुशवाहा की सफाई: ‘खबरें बेबुनियाद, नियम का किया पालन’

अपने ऊपर लगे इन आरोपों पर उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सामने आकर अपनी सफाई दी है। उन्होंने इन खबरों को “अत्यंत ही बेबुनियाद और तथ्य से परे” बताया है। कुशवाहा ने कहा कि RTI में जो जानकारी दी गई है वह अधूरी है, क्योंकि इसमें सिर्फ पेंशन शुरू होने की तारीख बताई गई है, न कि किसने, कब और कितनी राशि ली। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब वह किसी सदन के सदस्य नहीं थे, सिर्फ उसी कालावधि में उन्होंने पेंशन ली है।

‘डबल फायदा’ नहीं: नियम बताया और अपनी स्थिति साफ की

उपेंद्र कुशवाहा ने नियमों का हवाला देते हुए अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा, “मैं आज राज्यसभा का सदस्य हूं, अतः राज्यसभा से वेतन ले रहा हूं। विधानसभा/विधानपरिषद से पेंशन नहीं ले रहा हूं।” उन्होंने आगे बताया कि नियम भी यही है कि आप एक साथ किसी सदन का वेतन और किसी से पेंशन नहीं ले सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि वह इस नियम का शत-प्रतिशत पालन कर रहे हैं। यानी, जब वह किसी सदन में थे, तो सिर्फ वहां से वेतन लिया और उस दौरान पेंशन नहीं ली।

लिस्ट में शामिल अन्य नेताओं का क्या कहना है?

इस लिस्ट में शामिल कई अन्य नेताओं ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी है। कुछ नेताओं का कहना है कि अगर उनके खाते में कोई पेंशन आई है तो वे उसे वापस कर देंगे। देवेश चंद्र ठाकुर ने तो साफ कहा कि उन्होंने कभी पेंशन की मांग ही नहीं की। वहीं, नितीश मिश्रा ने दावा किया कि उन्होंने 2015 में सिर्फ एक महीने की पेंशन ली थी, जब वह किसी सदन के सदस्य नहीं थे, और उसके बाद कोई पेंशन नहीं ली गई। यह विवाद दिखाता है कि RTI के अधूरे खुलासे कैसे राजनीतिक हलचल पैदा कर सकते हैं।

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