जदयू में अनुशासन पर सख्ती, पार्टी विरोधियों पर कार्रवाई

जदयू में पार्टी विरोधी गतिविधियों पर सख्ती शुरू हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने ऐसे लोगों को सदस्यता न देने का आदेश दिया है। जांच के लिए कमिटी बनी है। कई नेताओं को निकाला गया, जबकि कई को नोटिस भेजा गया है।

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BNT Desk: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं पर अब सख्ती शुरू हो गई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने इसको लेकर स्पष्ट आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, जो लोग पार्टी लाइन के खिलाफ काम कर चुके हैं, उन्हें दोबारा पार्टी की सदस्यता नहीं दी जाएगी। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।

जांच के लिए कमिटी का गठन

इस फैसले को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए जदयू ने एक विशेष कमिटी का गठन किया है। यह कमिटी ऐसे लोगों की पहचान और जांच करेगी, जिन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप है। कमिटी यह भी देखेगी कि किन लोगों ने चुनाव या संगठनात्मक कामकाज के दौरान पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन किया है।

कई नेताओं को पार्टी से निकाला गया

जांच और समीक्षा के बाद पार्टी ने कई लोगों को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इनमें सबसे बड़ा नाम मधेपुरा से सांसद दिनेश चंद्र यादव के भाई रितेश चंद्र यादव का है। उनके निष्कासन को पार्टी में बड़ा और सख्त संदेश माना जा रहा है कि संगठन में किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नोटिस भेजकर मांगा गया जवाब

इसके अलावा पार्टी की ओर से कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस भी भेजे गए हैं। इन नोटिसों में उनसे उनके कामकाज और गतिविधियों को लेकर जवाब मांगा गया है। जानकारी के अनुसार, नोटिस पाने वालों में ज्यादातर लोग कटिहार, सहरसा और मधेपुरा जिलों से हैं।

संगठन को मजबूत करने की कोशिश

जदयू नेतृत्व का कहना है कि इन कार्रवाइयों का मकसद पार्टी संगठन को मजबूत करना और अनुशासन कायम रखना है। पार्टी साफ कर चुकी है कि जो भी नेता या कार्यकर्ता पार्टी के खिलाफ काम करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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