RLM में टूट और 'बहू' को पद दिलाने की चर्चा पर भड़के उपेंद्र कुशवाहा, मीडिया को दिया करारा जवाब

RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में टूट और बहू साक्षी मिश्रा को पद दिलाने की खबरों को 'बनावटी' बताते हुए मीडिया पर निशाना साधा है। परिवारवाद और विधायकों की नाराजगी की खबरों के बीच कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये दावे पूरी तरह बेबुनियाद और तथ्यहीन हैं।

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BNT Desk: NDA के साथी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी में मची हलचल और परिवारवाद के आरोपों को लेकर मीडिया पर बुरी तरह भड़क गए हैं। पिछले कुछ दिनों से खबरें चल रही थीं कि कुशवाहा की पार्टी टूटने वाली है और वे अपनी बहू साक्षी मिश्रा को राजनीति में सेट करने की कोशिश कर रहे हैं। इन चर्चाओं पर चुप्पी तोड़ते हुए कुशवाहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर मीडिया को अपनी प्रतिष्ठा का ख्याल रखने की नसीहत दे डाली है।

क्या है पूरा विवाद और कुशवाहा का गुस्सा?

उपेंद्र कुशवाहा ने मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह ‘तथ्यहीन और बनावटी’ करार दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, “मीडिया के बंधुओं, आजकल आप लोग मुझ पर कुछ ज्यादा ही मेहरबानी दिखा रहे हैं! मेरी नहीं तो कम से कम अपनी प्रतिष्ठा का ख्याल रखिए।” कुशवाहा का कहना है कि ऐसी झूठी खबरों की उम्र बहुत छोटी होती है और इससे उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है। दरअसल, चर्चा थी कि वे अपनी बहू साक्षी मिश्रा को राज्य नागरिक परिषद का उपाध्यक्ष बनवाना चाहते हैं, जो पद पहले माधव आनंद के पास था।

पार्टी में टूट की खबरों ने पकड़ी रफ्तार

पार्टी में नाराजगी की खबरें तब शुरू हुईं जब कुशवाहा के घर आयोजित ‘लिट्टी-चोखा’ पार्टी से उनकी ही पार्टी के तीन विधायक नदारद रहे। इसके तुरंत बाद आरएलएम (RLM) के कई कार्यकर्ताओं ने चिराग पासवान की पार्टी का दामन थाम लिया। इतना ही नहीं, पार्टी के विधायक माधव आनंद की बीजेपी नेता नितिन नवीन से मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

परिवारवाद के आरोपों पर अपनों ने ही घेरा

कुशवाहा को सिर्फ विरोधियों से ही नहीं, बल्कि अपनों से भी चुनौती मिल रही है। बाजापट्टी से विधायक रामेश्वर महतो ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश सरकार में मंत्री बनाए जाने पर सवाल उठाए और कहा कि पार्टी में अब जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं की जगह परिवार को महत्व दिया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इन आंतरिक कलह और आरोपों के बीच उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी को कैसे एकजुट रख पाते हैं।

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