BNT Desk: बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पूरक बजट पर चर्चा के दौरान सियासी माहौल एक बार फिर गरम हो गया। आरजेडी विधायक आलोक मेहता ने सरकार की वित्तीय नीति पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ही वित्तीय वर्ष में दूसरी बार बजट पेश करना समझ से परे है और यह राज्य की आर्थिक व्यवस्था की कमजोरियों को दर्शाता है।
“यह कोरोना काल नहीं, फिर दूसरा बजट क्यों?”
वाद-विवाद में भाग लेते हुए आलोक मेहता ने कहा- “यह कोरोना काल नहीं है कि वित्तीय वर्ष में दूसरा बजट पेश किया जाए। तब परिस्थितियाँ मजबूरी की थीं, लेकिन अब ऐसा कोई संकट नहीं है।”उनके अनुसार, बार-बार पूरक बजट लाने की जरूरत तभी पड़ती है जब योजनाओं की योजना निर्माण और क्रियान्वयन में गंभीर कमियां होती हैं।
ठेकेदारों से मिलीभगत का आरोप
चर्चा के दौरान मेहता ने सरकार पर ठेकेदारों से मिलीभगत का गंभीर आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पूरक बजट के पीछे असली कारण ठेकेदारों की बढ़ती मांगें हैं। उन्होंने कहा, “सरकार ठेकेदारों के दबाव में काम कर रही है, इसलिए योजनाएँ समय पर पूरी नहीं होतीं और ज़रूरत से ज़्यादा पैसा खर्च किया जाता है।”
असफल क्रियान्वयन पर निशाना
आलोक मेहता ने कहा कि योजनाओं में देरी और खराब प्रबंधन की वजह से बजट की राशि समय पर खर्च नहीं हो पा रही है। इसलिए सरकार को मजबूरी में पूरक बजट पेश करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआत से ही योजनाओं पर सख़्ती रखी जाती और काम समय पर होता, तो इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
वित्तीय अनुशासन की मांग
अंत में मेहता ने सरकार से वित्तीय अनुशासन अपनाने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता के पैसों की जिम्मेदारी सरकार की है और इस पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।