राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री विजय कृष्ण ने पार्टी के साथ-साथ राजनीति छोड़ने का भी ऐलान कर दिया है। उन्होंने लालू प्रसाद यादव को अपना इस्तीफा भेज दिया है। 74 साल के विजय कृष्ण का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वह हाल ही में जेल से बाहर आए हैं।
क्यों लिया राजनीति से संन्यास?
राजपूत बिरादरी से आने वाले विजय कृष्ण ने लालू यादव की आरजेडी और सक्रिय राजनीति से अलग होने का फैसला किया है। समाजवादी विचारधारा के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले विजय कृष्ण 60 के दशक से राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एक तरफ जहाँ उन्होंने लालू-राबड़ी की सरकार में मंत्री पद संभाला, वहीं बीच में एक बार टिकट न मिलने से नाराज होकर वह नीतीश कुमार की जेडीयू में भी चले गए थे।
जब नीतीश कुमार को दी थी मात
विजय कृष्ण को सबसे ज्यादा पहचान 2004 के लोकसभा चुनाव से मिली। उस समय लालू यादव ने उन्हें पटना जिले की बाढ़ सीट से बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ मैदान में उतारा था। इस कांटे की टक्कर में विजय कृष्ण ने जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया था। इससे पहले वह 1990 और 1995 में लगातार दो बार जनता दल के टिकट पर बाढ़ विधानसभा सीट से विधायक भी बन चुके थे।
10 साल जेल में रहे पूर्व मंत्री
विजय कृष्ण का राजनीतिक करियर कानूनी पचड़ों में भी फंसा। 2009 में एक मर्डर केस में वह अपने बेटे के साथ फंस गए थे। इस मामले में 2013 में कोर्ट ने विजय कृष्ण समेत चार लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई थी। इसके बाद उन्हें लगभग 10 साल जेल में बिताने पड़े। हालांकि, 2022 में पटना हाई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया, जिसके बाद वह जेल से बाहर आए। अब राजनीति छोड़ने के उनके इस फैसले ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।