कुशवाहा मिले दो नाराज विधायकों से; क्या इस मुलाकात से खत्म होगी पार्टी की बगावत?

बिहार की राजनीति में मचे घमासान के बीच उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी को टूटने से बचाने में जुट गए हैं। नाराज विधायक माधव आनंद और आलोक सिंह ने कुशवाहा से मुलाकात की, जिसकी तस्वीर भी साझा की गई। हालांकि, तीसरे विधायक की गैरमौजूदगी और बेटे को मंत्री बनाने पर उपजा विवाद अब भी बरकरार है

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BNT Desk: बिहार की राजनीति में इन दिनों कड़ाके की ठंड के बीच सियासी पारा चढ़ा हुआ है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी के भीतर मचे घमासान को शांत करने की कोशिश में जुट गए हैं। शुक्रवार की देर शाम पटना में कुशवाहा के सरकारी आवास पर एक अहम बैठक हुई। इस मुलाकात में कुशवाहा ने अपनी पार्टी के दो दिग्गज विधायकों, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह के साथ घंटों बातचीत की। यह मुलाकात इसलिए खास है क्योंकि पिछले कई दिनों से इन विधायकों के बागी तेवर अपनाने की खबरें चर्चा में थीं।

सोशल मीडिया पर फोटो से दिया संदेश

पार्टी ने इस मुलाकात की तस्वीरें अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर साझा की हैं। तस्वीरों में उपेंद्र कुशवाहा, मधुबनी से विधायक माधव आनंद और दिनारा से विधायक आलोक कुमार सिंह के साथ मुस्कुराते हुए “गपशप” करते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन तस्वीरों को सार्वजनिक करने का मकसद सिर्फ इतना है कि जनता और विपक्ष के बीच यह संदेश जाए कि पार्टी में सब कुछ ठीक है। कुशवाहा यह दिखाना चाहते हैं कि विधायकों की नाराजगी की खबरें महज अफवाहें हैं।

तीसरे विधायक की गैरमौजूदगी ने बढ़ाए सवाल

भले ही दो विधायक इस बैठक में शामिल हुए, लेकिन आरएलएम के तीसरे विधायक रामेश्वर महतो की गैरमौजूदगी ने एक बार फिर नए सवालों को जन्म दे दिया है। हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में कुशवाहा की पार्टी से 4 विधायक जीते थे, जिनमें से एक उनकी पत्नी स्नेहलता भी हैं। बाकी तीन विधायकों की नाराजगी की मुख्य वजह कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनवाना बताया जा रहा है। पार्टी के पुराने नेताओं का आरोप है कि कुशवाहा ने अपनों को छोड़कर ‘परिवारवाद’ को तवज्जो दी है।

नाराजगी और बीजेपी से बढ़ती नजदीकियां

विधायकों की यह नाराजगी तब खुलकर सामने आई जब उपेंद्र कुशवाहा की ‘लिट्टी पार्टी’ से तीनों विधायकों ने दूरी बना ली थी। इतना ही नहीं, इन विधायकों को हाल ही में बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ भी देखा गया था। दही-चूड़ा भोज में इनकी मौजूदगी ने इस चर्चा को हवा दी कि क्या ये विधायक पाला बदलने की तैयारी में हैं? फिलहाल, कुशवाहा की इस ‘डैमेज कंट्रोल’ कोशिश का क्या असर होता है, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।

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