पटना के यात्रियों को राहत: ऑटो यूनियन का बड़ा फैसला, फिलहाल नहीं बढ़ेगा किराया,

पटना में ऑटो किराया बढ़ने की चर्चाओं पर अब रोक लग गई है। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ऑटो यूनियन ने किराया नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। इस निर्णय से आम यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही प्रशासन ने निर्धारित किराया दर का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

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BNT Desk: पटना में ऑटो-रिक्शा किराया बढ़ाने की अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। जिला प्रशासन के कड़े ऐतराज के बाद ऑटो चालकों के संगठन ने किराया न बढ़ाने का फैसला लिया है। इससे रोजाना ऑटो से सफर करने वाले हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिली है, खासकर ऐसे समय में जब महंगाई और परिवहन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।

यूनियन का पक्ष

ऑटो मेन्स यूनियन बिहार के महासचिव अजय कुमार पटेल ने बताया कि संगठन ने यह निर्णय लिया है कि जब तक जिला प्रशासन की ओर से किराया बढ़ाने की औपचारिक अनुमति नहीं मिलती, तब तक ऑटो पुराने किराये पर ही चलेंगे। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधा और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना यूनियन की प्राथमिकता है।

कैसे शुरू हुआ विवाद

बीते दिनों गांधी मैदान–पटना जंक्शन रूट पर चलने वाले ऑटो चालकों ने यूनियन की बैठक के बाद किराया बढ़ाने की घोषणा कर दी थी। यूनियन का दावा था कि सभी चालकों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है। हालांकि, यह फैसला बिना प्रशासनिक मंजूरी के लिया गया था, जिस पर सवाल खड़े हो गए।

प्रशासन की सख्त आपत्ति

जिला प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए साफ कहा कि बिना आधिकारिक आदेश के किराया बढ़ाना नियमों के खिलाफ है। अधिकारियों ने इस कदम पर नाराजगी जताई और यूनियन पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बातचीत के बाद किराया बढ़ोतरी को फिलहाल रोकने पर सहमति बनी।

यूनियन की मांग और बातचीत

ऑटो यूनियन का कहना है कि डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों से चालकों की आमदनी प्रभावित हो रही है। इसी कारण किराया बढ़ाने पर विचार किया गया था। प्रशासन ने यूनियन की समस्याओं को सुना और भविष्य में किराये की व्यापक समीक्षा का भरोसा दिया।

नियमों के पालन के निर्देश

प्रशासन ने ऑटो चालकों को तय किराया सूची का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। बिना अनुमति अधिक किराया वसूलने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। पटना में ऑटो पुराने किराये पर ही चलेंगे। भविष्य में किसी भी बदलाव पर प्रशासन और यूनियन की सहमति के बाद ही फैसला लिया जाएगा।

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