पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर सोमवार देर रात अचानक हलचल देखने को मिली। देर रात कई गाड़ियों में घर का सामान और पौधे बाहर ले जाए गए, जिसे आसपास के लोगों ने देखा। इस घटनाक्रम के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। यह वही आवास है, जहां लालू प्रसाद यादव का परिवार करीब दो दशकों तक रहा और जिसे बिहार की राजनीति में खास पहचान मिली हुई थी।
BJP का आरोप: ‘चोरों की तरह रात में खाली कराया गया घर’
इस पूरे मामले को लेकर भाजपा ने लालू परिवार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि नियमों के तहत कार्रवाई से बचने के लिए राबड़ी आवास को “चोरों की तरह रात के अंधेरे में” खाली किया गया। पार्टी का कहना है कि सत्ता में न होने के बावजूद वर्षों तक सरकारी सुविधाओं का लाभ लिया गया और अब दबाव बढ़ने पर अचानक घर खाली करना पड़ा। भाजपा ने इसे सुशासन और कानून के समान रूप से लागू होने की मिसाल बताया।
सरकारी आदेश और नए आवास की भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, राबड़ी देवी को पहले ही सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था और उन्हें वैकल्पिक सरकारी आवास भी आवंटित किया गया है। हालांकि, देर रात शिफ्टिंग को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि सब कुछ नियमानुसार था, तो फिर आवास रात में ही क्यों खाली किया गया। यही सवाल इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा विवादित बना रहा है।
RJD का पलटवार, बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राबड़ी देवी ने सरकारी आदेश का पालन करते हुए आवास खाली किया है और इसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। RJD ने आरोप लगाया कि भाजपा सम्मानित नेताओं को बदनाम करने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। इस विवाद ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी को हवा दे दी है।