बिहार के किसानों के लिए डबल खुशखबरी: PM फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव, एक किसान का नुकसान भी होगा तो मिलेगा मुआवजा; जल्द आएगी कर्पूरी ठाकुर सम्मान निधि

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बिहार के किसानों के लिए डबल खुशखबरी: PM फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव, एक किसान का नुकसान भी होगा तो मिलेगा मुआवजा; जल्द आएगी कर्पूरी ठाकुर सम्मान निधि

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में किया ऐलान — अब बीमा कंपनी को हर हाल में देना होगा मुआवजा; खरीफ के लिए सिर्फ 2% प्रीमियम पर मिलेगी सुरक्षा


पटना, 18 मार्च। बिहार के किसानों के लिए एक के बाद एक खुशखबरियां आ रही हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि मिलने के बाद अब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़े बदलावों का ऐलान किया है। इस बदलाव का सीधा फायदा बिहार के लाखों किसानों को मिलेगा। इसके अलावा कुछ ही दिनों में बिहार के किसानों को कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि की राशि भी मिलने वाली है। यानी किसानों के लिए यह डबल खुशखबरी का मौसम है।

सबसे बड़ा बदलाव — एक किसान का नुकसान भी नहीं होगा नजरअंदाज

अब तक फसल बीमा योजना में मुआवजे के लिए एक बड़े क्षेत्र में सामूहिक नुकसान जरूरी माना जाता था, जिससे कई किसान फायदे से वंचित रह जाते थे। लेकिन अब शिवराज सिंह चौहान ने संसद में साफ कहा है कि यदि एक भी किसान को फसल का नुकसान होता है तो बीमा कंपनी को उसे मुआवजा देना ही होगा। यह बदलाव छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद अहम है जो अकेले नुकसान उठाने के बावजूद पहले मुआवजे से वंचित रह जाते थे।

क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

प्रधानमंतत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत 2016 में की गई थी। सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, कीट और बीमारियों जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसानों के नुकसान की भरपाई करना और उनकी आय को स्थिर रखना इस योजना का मुख्य मकसद है। यह एक ऐच्छिक योजना है, यानी किसान अपनी मर्जी से इसमें शामिल हो सकते हैं। अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी किसानों को इसका लाभ मिलता है। खास बात यह है कि इसमें बटाईदार और काश्तकार किसान भी शामिल हो सकते हैं।

बेहद कम प्रीमियम में मिलती है बड़ी सुरक्षा

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना होता है। खरीफ फसल के लिए सिर्फ 2 प्रतिशत, रबी फसल के लिए डेढ़ प्रतिशत और बागवानी या कमर्शियल फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम किसान को चुकाना होता है। प्रीमियम का बाकी हिस्सा राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर वहन करती हैं। यानी सरकार खुद किसान की तरफ से बीमा कंपनी को पैसा देती है।

कैसे मिलता है मुआवजा, कौन से दस्तावेज जरूरी

योजना का लाभ उठाने के लिए किसान के पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जमीन से जुड़े दस्तावेज और सेल्फ अटेस्टेड घोषणापत्र होना जरूरी है। फसल नुकसान का आकलन अब आधुनिक तकनीक से किया जाता है। सैटेलाइट इमेजरी और क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट के जरिए नुकसान का सटीक अनुमान लगाया जाता है। मुआवजे की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है।

जल्द मिलेगी कर्पूरी ठाकुर सम्मान निधि भी

बिहार के किसानों के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि कुछ ही दिनों में कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि की राशि भी उनके बैंक खातों में आने वाली है। यह राशि पहले से मिल रही पीएम किसान सम्मान निधि के अतिरिक्त होगी। ऐसे में बिहार के किसानों के लिए यह समय वास्तव में राहत और उम्मीद का समय है। फसल बीमा में बड़े बदलाव और सम्मान निधि की दोहरी सौगात मिलकर किसानों की आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेंगी।

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