पटना छात्रा मौत मामला: हत्या या आत्महत्या? डमी बॉडी के जरिए राज खोलेगी बिहार पुलिस

पटना के फुलवारी शरीफ में छात्रा की संदिग्ध मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए बिहार पुलिस और FSL की टीम आज सीन रीक्रिएशन करेगी। छत से डमी बॉडी को अलग-अलग एंगल से गिराकर वैज्ञानिक तरीके से यह पता लगाया जाएगा कि यह हत्या थी या आत्महत्या। पुलिस रिपोर्ट का इंतजार है।

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BNT Desk: पटना के फुलवारी शरीफ स्थित एम्स गोलंबर के पास एक छात्रा की छत से गिरकर हुई संदिग्ध मौत के मामले में बिहार पुलिस अब विज्ञान का सहारा ले रही है। मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस और एफएसएल (FSL) की टीम आज ‘क्राइम सीन रीक्रिएशन’ करने जा रही है।

डमी बॉडी के साथ सीन रीक्रिएशन

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा की मौत आत्महत्या थी या उसकी हत्या कर उसे छत से फेंका गया था। इसके लिए छात्रा के वजन और कद की एक डमी (पुतला) तैयार की गई है। इस डमी को उसी छत से अलग-अलग एंगल और स्थितियों में नीचे गिराया जाएगा।

जांच के प्रमुख पहलू

  1. फॉलिंग एंगल (गिरने का कोण): एफएसएल की टीम यह देखेगी कि खुद कूदने पर शरीर कितनी दूर गिरता है और धक्का देने पर शरीर की स्थिति क्या होती है।
  2. चोटों का मिलान: डमी के गिरने से जिस तरह के निशान या प्रभाव पड़ेंगे, उनका मिलान छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों से किया जाएगा।
  3. विशेषज्ञों की मौजूदगी: यह पूरी प्रक्रिया पुलिस के आला अधिकारियों और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की सीधी निगरानी में होगी ताकि सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो।

क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?

अक्सर ऊंचाई से गिरने के मामलों में यह तय करना मुश्किल होता है कि व्यक्ति खुद कूदा है या उसे गिराया गया है। डमी बॉडी का उपयोग कर पुलिस गुरुत्वाकर्षण और गति के सिद्धांतों के आधार पर सच के करीब पहुँचने की कोशिश करेगी। फिलहाल, पुलिस की टीमें और एफएसएल विशेषज्ञ घटनास्थल पर पहुँच रहे हैं। इस रीक्रिएशन के बाद आने वाली रिपोर्ट इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा तय करेगी।

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