पटना का ‘करोड़पति भिखारी’: स्टेशन पर मांगता है भीख, बैंक में जमा हैं इतना

Parambir Singh
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करोड़पति भिखारी

पटना। बिहार की राजधानी पटना से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस और आम जनता दोनों के होश उड़ा दिए हैं। अक्सर हम फटेहाल कपड़ों में भीख मांगते लोगों को देखकर उन पर तरस खाते हैं, लेकिन पटना जंक्शन पर भीख मांगने वाले पप्पू कुमार की हकीकत कुछ और ही निकली। जांच में पता चला है कि यह ‘लाचार’ दिखने वाला शख्स असल में करोड़ों की संपत्ति का मालिक है।

कैसे खुला राज?

मामला तब प्रकाश में आया जब जीआरपी (GRP) ने पटना स्टेशन पर अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत भिखारियों की धरपकड़ की। जब पप्पू की तलाशी ली गई, तो पुलिसकर्मी दंग रह गए। उसके पास से PNB, SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा और इलाहाबाद बैंक जैसे प्रतिष्ठित बैंकों के चार एटीएम कार्ड बरामद हुए। जब इन खातों की जांच की गई, तो पता चला कि उनमें लाखों रुपए जमा हैं।

मुंबई की एक दुर्घटना ने बदला रास्ता

पप्पू की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है। जानकारी के अनुसार:

  • नाराजगी और पलायन: सालों पहले पिता की डांट से नाराज होकर पप्पू मुंबई भाग गया था।

  • हादसा: वहां ट्रेन से गिरकर उसका एक हाथ जख्मी हो गया। इलाज के दौरान उसके सारे पैसे खत्म हो गए।

  • पहली कमाई: स्टेशन पर मजबूरी में खड़े पप्पू को देख किसी ने उसे पैसे दिए। पहले ही दिन उसे 500 रुपये मिले।

  • पेशा: अच्छी कमाई देख पप्पू ने इसे ही अपना पेशा बना लिया और मुंबई से अच्छी-खासी रकम जमा कर पटना लौट आया।

आलीशान निवेश और परिवार

पप्पू सिर्फ बैंक बैलेंस तक ही सीमित नहीं है। जांच में जो अन्य निवेश सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:

  1. जमीन के मालिक: पटना सिटी और दीघा जैसे रिहायशी इलाकों में पप्पू के नाम पर कीमती जमीनें हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है।

  2. हाई-प्रोफाइल लाइफ: पप्पू शादीशुदा है और उसका बेटा शहर के एक नामी इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाई कर रहा है।

“पप्पू का मामला यह सवाल खड़ा करता है कि क्या भीख देना वाकई किसी की मदद करना है या किसी बड़े संगठित व्यापार को बढ़ावा देना।”

सवा करोड़ का मालिक, फिर भी स्टेशन पर क्यों?

इतनी संपत्ति होने के बावजूद पप्पू आज भी पटना जंक्शन पर भीख मांगता नजर आता है। उसके पास करीब सवा करोड़ की कुल संपत्ति होने का अनुमान है। स्थानीय लोगों और यात्रियों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि जिसे वे सिक्का देकर मदद करते थे, वह उनसे कहीं ज्यादा धनवान है।

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