BNT Desk: दुनिया के एक कोने में जारी युद्ध और तनाव का सीधा असर पटना के ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) और आसपास के क्षेत्रों में जारी सैन्य गतिविधियों के कारण वैश्विक गैस सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत अपनी गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, और सप्लाई में आई इसी बाधा की वजह से कीमतों को बढ़ाना मजबूरी बन गया है।
इंडस्ट्रियल और कमर्शियल PNG के नए दाम: एक नजर में
गेल इंडिया लिमिटेड ने पटना के लिए गैस की नई दरें जारी कर दी हैं। यह बढ़ोतरी इंडस्ट्रियल और कमर्शियल श्रेणियों में काफी अधिक है:
| गैस की श्रेणी | पुराना रेट (प्रति यूनिट) | नया रेट (प्रति यूनिट) |
| इंडस्ट्रियल PNG | 54.03 रुपये | 80.90 रुपये |
| कमर्शियल PNG | 74.65 रुपये | 87.89 रुपये |
इंडस्ट्रियल PNG की कीमतों में लगभग 26 रुपये से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है, जो औद्योगिक इकाइयों के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ है।
किसे पड़ेगा सबसे ज्यादा घाटा?
पटना में वर्तमान में लगभग 108 ऐसे बड़े उपभोक्ता हैं जो कमर्शियल और इंडस्ट्रियल PNG का उपयोग करते हैं।
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होटल और रेस्टोरेंट: कमर्शियल गैस महंगी होने से बाहर खाना खाना महंगा हो सकता है। रेस्टोरेंट संचालक अपनी बढ़ी हुई लागत की भरपाई खाने की कीमतों में बढ़ोतरी करके कर सकते हैं।
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MSME उद्योग: छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए उत्पादन लागत (Production Cost) बढ़ जाएगी। इससे बाजार में उन उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ेगा।
आम आदमी को राहत: CNG और घरेलू रसोई गैस स्थिर
भले ही उद्योगों पर बोझ बढ़ा हो, लेकिन पटना के आम नागरिकों और वाहन चालकों के लिए फिलहाल राहत की खबर है। गेल ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपयोग वाली PNG और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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घरेलू PNG: 49.44 रुपये प्रति यूनिट (यथावत)
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CNG: 87.90 रुपये प्रति किलोग्राम (यथावत)
यह राहत मध्यम वर्ग के लिए बड़ी खबर है, क्योंकि रसोई गैस और ट्रांसपोर्ट की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे घर के बजट को बिगाड़ देती है।
क्या आगे और बढ़ेंगी कीमतें? विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले हफ्तों में CNG और घरेलू PNG की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। अगर ट्रांसपोर्टेशन और बीमा खर्च (Shipping Cost) बढ़ता है, तो गेल इंडिया को अन्य श्रेणियों में भी रेट बढ़ाने पड़ सकते हैं।
बाजार में बढ़ेगी महंगाई की आहट
जब भी ऊर्जा (गैस या तेल) के दाम बढ़ते हैं, उसका ‘डोमिनो इफेक्ट’ पूरे बाजार पर दिखता है। औद्योगिक इकाइयों की बढ़ी हुई लागत अंततः उपभोक्ताओं तक ही पहुँचती है। पटना के व्यापारियों का कहना है कि लागत में 30% से 40% तक की यह वृद्धि उनके मुनाफे को कम करेगी और मजबूरन उन्हें अपनी सेवाओं के दाम बढ़ाने पड़ेंगे।
भू-राजनीति और स्थानीय प्रभाव
पटना में हुई यह गैस मूल्य वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि आज की दुनिया में कोई भी शहर वैश्विक घटनाओं से अछूता नहीं है। 11 अप्रैल 2026 की यह रिपोर्ट बताती है कि आने वाले दिन पटना के उद्यमियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। फिलहाल, सबकी नजरें अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ताओं पर टिकी हैं, ताकि आपूर्ति बहाल हो और कीमतें फिर से सामान्य स्तर पर आ सकें।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह
इंडस्ट्रियल और कमर्शियल यूनिट्स को अब ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि बढ़ी हुई लागत के प्रभाव को कम किया जा सके।