BNT Desk: पटना में ऑटो और ई-रिक्शा से बढ़ती ट्रैफिक समस्या को कम करने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। शहर में लगातार बढ़ती भीड़, जाम और अव्यवस्था को देखते हुए डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने नई योजना लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत पूरे शहर को तीन जोन—ग्रीन, येलो और ब्लू—में बाँटा गया है, और हर जोन में वाहनों की संख्या सीमित की जाएगी।
ऑटो और ई-रिक्शा पर नए नियम
पटना में लंबे समय से बिना किसी नियम के ऑटो-रिक्शा और ई-रिक्शा चलने से कई इलाकों में भीषण जाम की स्थिति बन जाती है। पटना जंक्शन, राजीव नगर, बोरिंग रोड, डाकबंगला, गांधी मैदान और अशोक राजपथ जैसे इलाकों में लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। इसी समस्या का हल निकालने के लिए जिला प्रशासन ने ऑटो और वाहन संघों के साथ बैठक की, जिसमें नया रूट प्लान तैयार किया गया। सभी संगठनों ने इस व्यवस्था पर सहमति जताई है और जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
26 रूट तय, सीमित संख्या में वाहन चलेंगे
पटना में ऑटो और ई-रिक्शा संचालन को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है। शहर में कुल 26 रूट तय किए गए हैं। हालांकि पटना में 22,065 वाहन पंजीकृत हैं, लेकिन इन रूटों पर सिर्फ 18,181 ऑटो और ई-रिक्शा चलाने की अनुमति मिलेगी।प्रशासन ने करीब 10% वाहन रिजर्व रखने का फैसला लिया है, जो विशेष परिस्थितियों और प्रशासनिक कार्यों में उपयोग किए जाएंगे।
ग्रीन, येलो और ब्लू जोन की नई व्यवस्था
नई यातायात योजना के तहत पूरे शहर को तीन जोन—ग्रीन, येलो और ब्लू में विभाजित किया गया है ताकि ट्रैफिक को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके। ग्रीन जोन में बाजार, स्टेशन, स्कूल, भीड़भाड़ वाले और संकरी गलियों वाले इलाके शामिल हैं, जहां वाहनों की संख्या पर सख्त नियंत्रण रहेगा। येलो जोन उन क्षेत्रों को दर्शाता है जहां सड़कें चौड़ी हैं और ट्रैफिक का दबाव तुलनात्मक रूप से कम होता है। वहीं ब्लू जोन शहर के प्रवेश और निकास के मुख्य पॉइंट हैं, जहां से बड़ी संख्या में वाहन रोजाना शहर में आते-जाते हैं। इस विभाजन का उद्देश्य ट्रैफिक जाम कम करना और यात्रा को आसान बनाना है।