NEET छात्रा मौत केस में जांच एजेंसियों पर कोर्ट सख्त, पटना पॉक्सो कोर्ट में पुलिस, SIT और CBI को फटकार

जहानाबाद की NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में पटना पॉक्सो कोर्ट ने पुलिस, SIT और CBI को कड़ी फटकार लगाई। नींद की गोलियों और मोबाइल जांच को लेकर अधिकारियों के अलग-अलग जवाब सामने आए। मामले में लापरवाही के आरोप के बीच अब यह मामला हाईकोर्ट तक जा सकता है।

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BNT Desk: जहानाबाद की NEET छात्रा की पटना में हुई संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस बार वजह है कोर्ट में हुई सुनवाई, जहां जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे। पटना के पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस, SIT और CBI के अधिकारियों को कोर्ट की कड़ी फटकार झेलनी पड़ी।

नींद की गोलियों पर अलग-अलग जवाब

सुनवाई के दौरान जज ने सबसे पहले छात्रा के कमरे से मिली नींद की गोलियों के बारे में सवाल किया। लेकिन इस पर तीन अलग-अलग जांच एजेंसियों के अधिकारियों ने अलग-अलग जवाब दिए। चित्रगुप्त नगर थाना की तत्कालीन थानेदार रोशनी ने कहा कि कमरे से सिर्फ एक गोली मिली थी। इसके बाद SIT की डीएसपी अनु कुमारी ने बताया कि तीन गोलियां मिली थीं। वहीं CBI अधिकारियों ने कहा कि कमरे से पांच गोलियां बरामद हुई थीं। एक ही कमरे से मिली गोलियों की संख्या पर तीन अलग-अलग जवाब सुनकर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि इस तरह की जांच से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है।

मोबाइल की जांच भी नहीं की गई

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने छात्रा के मोबाइल फोन को लेकर भी सवाल किया। जब कोर्ट ने CBI से पूछा कि मोबाइल की जांच की गई है या नहीं, तो जवाब मिला कि मोबाइल SIT से मिलने के बाद जब्त तो कर लिया गया, लेकिन उसकी जांच नहीं की गई। कोर्ट ने यह भी पूछा कि आरोपी मनीष के मोबाइल की जांच हुई या नहीं। इस पर भी अधिकारियों ने ‘नहीं’ में जवाब दिया। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब जांच ही नहीं करनी थी तो मोबाइल जब्त क्यों किया गया।

माता-पिता का बयान तक दर्ज नहीं

मामले में लापरवाही का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अब तक मृतका के माता-पिता का बयान भी दर्ज नहीं किया गया है। यह बात सामने आने के बाद कोर्ट ने अधिकारियों पर नाराजगी जताई और कहा कि यह गंभीर लापरवाही है।

कोर्ट के बाहर मां हुई बेहोश

सुनवाई के दौरान कोर्ट के बाहर छात्रा की मां अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रही थीं। इसी दौरान वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। मां का आरोप है कि पुलिस और जांच एजेंसियां मामले में सच्चाई सामने लाने के बजाय लीपापोती कर रही हैं।

हाईकोर्ट में जा सकता है मामला

अब इस मामले में कोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज होने की बात सामने आ रही है और यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंच सकता है। फिलहाल हॉस्टल संचालक मनीष रंजन की जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा गया है। अब सभी की नजर आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

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