BNT Desk: बिहार में पिछले कई दिनों से चर्चा का विषय बनी NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब एक बड़ा मोड़ आया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पूरे केस की जांच अब देश की सबसे बड़ी एजेंसी CBI से कराने का फैसला किया है। राज्य के गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सरकार चाहती है कि इस मामले की जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
क्या है पूरा मामला और क्यों मचा बवाल?
बता दें कि यह घटना पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल की है, जहाँ जहानाबाद की रहने वाली एक छात्रा रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। छात्रा 6 जनवरी को हॉस्टल में बेहोश मिली थी और इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। शुरू में पुलिस इसे आत्महत्या बता रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल की जांच में यौन शोषण की पुष्टि होने के बाद पुलिसिया जांच पर सवाल उठने लगे। परिजनों का आरोप है कि पुलिस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रही थी।
सांसद पप्पू यादव ने पुलिस को घेरा
इस मामले को लेकर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने मोर्चा खोल रखा है। उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। पप्पू यादव ने कहा, “पुलिस दोषियों को बचाने के लिए पीड़ित परिवार को ही प्रताड़ित कर रही है। पिता और भाई का डीएनए टेस्ट करवाना शर्मनाक है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस कांड में हॉस्टल मालिक से लेकर अस्पताल और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत है। यादव ने साफ कहा कि जब तक उस बेटी को न्याय नहीं मिल जाता, वे चुप नहीं बैठेंगे।
परिजनों और छात्रों का आक्रोश लाया रंग
लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन और परिजनों द्वारा दी गई आत्मदाह की चेतावनी के बाद सरकार बैकफुट पर आई है। बीते कल ही पटना की सड़कों पर छात्राओं ने ‘न्याय मार्च’ निकाला था। भारी जन आक्रोश और विपक्षी दलों के दबाव को देखते हुए आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और केस सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करनी पड़ी। अब सबकी निगाहें सीबीआई पर टिकी हैं कि क्या वह उन ‘सफेदपोश’ गुनहगारों तक पहुँच पाएगी जिनका जिक्र बार-बार इस मामले में हो रहा है।