BNT Desk: राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने दावा किया है कि बिहार अब पूरी तरह से ‘नक्सल मुक्त’ हो गया है। डीजीपी विनय कुमार और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने साझा प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सख्त पुलिसिंग और लगातार चले अभियानों की वजह से अब राज्य का एक भी जिला नक्सल प्रभावित नहीं रहा। यह बिहार की कानून-व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।
अपराध के ग्राफ में आई भारी गिरावट
सिर्फ नक्सलवाद ही नहीं, बल्कि आम जनता को डराने वाले गंभीर अपराधों में भी कमी आई है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में डकैती की वारदातों में सबसे ज्यादा 24.87% की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, हत्या के मामलों में 7.72% और दंगों की घटनाओं में लगभग 18% की कमी आई है। डीजीपी का कहना है कि तकनीक के सही इस्तेमाल और मुस्तैद पुलिसिंग की वजह से अपराधियों के हौसले पस्त हुए हैं।
अपराधियों की संपत्ति पर चला डंडा
पुलिस अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए उनकी संपत्ति भी जब्त कर रही है। अब तक 70 बड़े अपराधियों की संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और करीब 1400 से ज्यादा अपराधी पुलिस के रडार पर हैं। इस साल हत्या, लूट और दुष्कर्म जैसे संगीन जुर्म में शामिल 3.35 लाख से अधिक लोगों को जेल भेजा गया है। साथ ही, शराबबंदी कानून को लेकर भी पुलिस सख्त दिखी, जहां लाखों लीटर देसी-विदेशी शराब जब्त की गई।
साइबर ठगों और माफियाओं की अब खैर नहीं
बदलते दौर में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने के लिए पुलिस ने 103 बड़े मामलों की तकनीकी जांच कर कार्रवाई की है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में पुलिस व्यवस्था को और भी पारदर्शी और हाईटेक बनाया जाएगा। कुल मिलाकर, बिहार पुलिस का यह दावा आम जनता को राहत देने वाला है कि अब गलियों से लेकर सुदूर गांवों तक सुरक्षा का माहौल पहले से कहीं बेहतर हुआ है।