Nitish Kumar की विदाई से बिहार की बेटियों में मायूसी, राजनीति में ‘निशी’ की एंट्री पर क्या बोलीं?

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पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बड़े युग के अंत की आहट सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के राज्यसभा जाने और सक्रिय मुख्यमंत्री की भूमिका से हटने की चर्चाओं ने पूरे राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया है। इस बीच, नीतीश कुमार के सबसे मजबूत किले यानी ‘महिला वोट बैंक’ के बीच Bihar News Today की टीम ने उनके इस फैसले का प्रभाव जानने की कोशिश की।

“अभी 5 साल और रहना चाहिए था” – छात्राओं का छलका दर्द

पटना की सड़कों और कॉलेजों में जब छात्राओं से बात की गई, तो उनमें से अधिकतर के चेहरे पर मायूसी दिखी। एक छात्रा ने भावुक होकर कहा, “नीतीश कुमार ने लड़कियों के लिए बहुत कुछ किया है। साइकिल योजना से लेकर 12वीं पास करने पर मिलने वाली 25,000 रुपये की राशि तक, उन्होंने हमें आत्मनिर्भर बनाया। उन्हें अभी कम से कम 5 साल और पद पर रहना चाहिए था।”

ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली लड़कियों का मानना है कि नीतीश कुमार के फैसलों की वजह से ही उनके परिवारों ने उन्हें शहर भेजने की हिम्मत जुटाई। उनके अनुसार, नीतीश कुमार ने न केवल शिक्षा बल्कि सुरक्षा का भी भरोसा दिया था।

निशांत कुमार की एंट्री: उम्मीद और संशय के बीच

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार (निशी) की जेडीयू में औपचारिक एंट्री पर भी महिलाओं ने बेबाकी से अपनी राय रखी। कुछ महिलाओं का मानना है कि “बेटा पिता के ही नक्शेकदम पर चलेगा,” जबकि कुछ ने इसे वंशवाद से जोड़कर देखा।

एक महिला ने कहा, “निशांत कुमार राजनीति के लिए नए हैं। क्या वो महिलाओं के उसी विश्वास को जीत पाएंगे जो नीतीश जी ने जीता था? यह कहना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन हमें उम्मीद है कि वो पिता के अधूरे सपनों को पूरा करेंगे।”

अगला मुख्यमंत्री कौन? चिराग और सम्राट चौधरी के नाम की चर्चा

नीतीश कुमार के बाद बिहार की कमान किसके हाथ में होगी? इस सवाल पर महिलाओं की पसंद बंटी हुई दिखी।

  • चिराग पासवान: युवाओं और महिलाओं के बीच चिराग पासवान की लोकप्रियता काफी अधिक दिखी। कई महिलाओं ने उन्हें “बिहार का भविष्य” बताया।

  • सम्रत चौधरी: भाजपा की ओर से सम्राट चौधरी को भी एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

  • नया चेहरा: कुछ महिलाओं का यह भी मानना है कि भाजपा किसी ऐसे नए चेहरे को सामने ला सकती है, जिसकी किसी ने कल्पना भी न की हो।

कुछ ने जताई नाराजगी: “बीच में पद छोड़ना विश्वासघात”

जहाँ एक तरफ सराहना हुई, वहीं कुछ महिलाओं ने नीतीश कुमार के कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देने को “विश्वासघात” बताया। उनका तर्क था कि जनता ने नीतीश कुमार के चेहरे को देखकर वोट दिया था, ऐसे में बीच में कुर्सी छोड़ना लोकतांत्रिक रूप से सही नहीं है। वहीं, कुछ महिलाओं ने उनके हालिया विवादित बयानों का हवाला देते हुए कहा कि अब उनके लिए आराम करने और नई पीढ़ी को मौका देने का सही समय है।

नीतीश कुमार ने अपने दो दशकों के कार्यकाल में बिहार की महिलाओं के बीच जो जगह बनाई है, उसे भर पाना किसी भी नए नेता के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। क्या निशांत कुमार इस विरासत को आगे ले जाएंगे या बिहार की राजनीति किसी नए ध्रुव की ओर मुड़ जाएगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

Bihar News Today के लिए श्रुति चौबे की रिपोर्ट 

यहां पूरा वीडियो देखिए –

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