राज्यसभा नामांकन के बाद भी जारी है समृद्धि यात्रा, क्या Nitish Kumar फिर मारेंगे पलटी?

बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav और AIMIM नेता Akhtarul Iman के बीच पटना में बैठक हुई है। अब सबकी नजर Asaduddin Owaisi के फैसले पर है, जो महागठबंधन को समर्थन दे सकते हैं।

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BNT Desk: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक ही सवाल चर्चा में है कि क्या मुख्यमंत्री Nitish Kumar फिर से राजनीतिक पलटी मारेंगे। दरअसल उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन कर दिया है, लेकिन इसके साथ ही उनकी समृद्धि यात्रा भी जारी है। साथ ही उन्होंने अभी तक मुख्यमंत्री पद छोड़ने की कोई तारीख घोषित नहीं की है। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

समृद्धि यात्रा का क्या है मतलब

10 मार्च को नीतीश कुमार ने सुपौल से समृद्धि यात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत की। इस दौरान वे विभिन्न जिलों में जाकर विकास योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं और जनता को संबोधित भी कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने का प्रयास है कि दिल्ली जाने के बाद भी बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका बनी रहेगी।

नए मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। सूत्रों के अनुसार, राज्य में सत्ता का यह परिवर्तन धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से किया जा रहा है ताकि किसी भी तरह का राजनीतिक असंतोष न पैदा हो। माना जा रहा है कि अगला मुख्यमंत्री NDA की ओर से ही होगा।

अप्रैल में हो सकता है सत्ता परिवर्तन

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार की विदाई जल्द हो सकती है। संभावना जताई जा रही है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में वे पद छोड़ सकते हैं। इसके बाद विधानसभा में एक विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है, जिसमें उनके कार्यकाल और योगदान पर चर्चा होगी।

Nitish Kumar की सम्मानजनक विदाई की तैयारी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह किसी तरह की राजनीतिक पलटी नहीं बल्कि एक सम्मानजनक विदाई की प्रक्रिया है। नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति के अहम नेता रहे हैं और उनके नेतृत्व में राज्य की राजनीति ने कई बड़े बदलाव देखे हैं। इसलिए उनकी विदाई भी राजनीतिक रूप से खास मानी जा रही है।

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