BNT Desk: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन आज उस वक्त हड़कंप मच गया, जब RJD के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने NEET छात्रा हत्याकांड’ को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए। भाई वीरेंद्र ने सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन को घेरते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में रसूखदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जब भी कोई इस मुद्दे पर आवाज उठाता है, तो पुलिस के बड़े अधिकारी उसे फोन कर चुप रहने की चेतावनी देते हैं।
बड़े नेताओं के बेटों को बचाने का आरोप
विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए भाई वीरेंद्र ने कहा कि इस हत्याकांड के पीछे कई प्रभावशाली नेताओं के बेटों का हाथ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने करीबियों को बचाने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर रही है और जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। विधायक ने साफ कहा कि यह केवल एक साधारण चेतावनी नहीं है, बल्कि सिस्टम का दुरुपयोग है ताकि सच सामने न आ सके।
पुलिस अधिकारियों से मिल रही हैं धमकियां
राजद विधायक ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए बताया कि जैसे ही वे इस मामले को मीडिया या सदन में उठाते हैं, उन्हें बड़े पुलिस अधिकारियों के फोन आने लगते हैं। अधिकारियों द्वारा उनसे कहा जाता है कि, “सर, आप इस मामले पर बयान क्यों दे रहे हैं? ऐसे बयान मत दीजिए।” भाई वीरेंद्र ने कहा कि पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से इस मामले में ‘लीपापोती’ करने में जुटे हुए हैं और उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे न्याय के लिए अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
विपक्ष ने की स्वतंत्र जांच की मांग
इस खुलासे के बाद सदन के अंदर और बाहर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों के कई अन्य विधायकों ने भी भाई वीरेंद्र का समर्थन किया और सरकार से इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि अगर सरकार ने इस गंभीर मुद्दे को संजीदगी से नहीं लिया, तो राज्य की कानून व्यवस्था पर से जनता का भरोसा उठ जाएगा।
न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प
भाई वीरेंद्र ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिली, तो विपक्ष सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगा। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में सत्ता के संरक्षण और पुलिसिया दबाव के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्हें अब नजरअंदाज करना सरकार के लिए मुश्किल होगा।