BNT Desk: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में पुलिस का एक बेहद दिलचस्प और कड़ा रूप देखने को मिला है। एक नाबालिग युवती के अपहरण के मामले में महीनों से फरार चल रहे आरोपी को पकड़ने के लिए बरियापुर थाना पुलिस ने पारंपरिक तरीके से हटकर ‘बैंड-बाजे’ का सहारा लिया। जिले के भारथीपुर गाँव में जब पुलिस ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ पहुंची, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।
बैंड-बाजे के साथ गांव में पुलिस की दस्तक
आमतौर पर बैंड-बाजे का इस्तेमाल शादियों या खुशी के मौकों पर होता है, लेकिन मुजफ्फरपुर पुलिस ने इसका इस्तेमाल कानून का खौफ पैदा करने के लिए किया। बरियापुर थाना पुलिस की एक टीम जब भारी लाव-लश्कर और बैंड पार्टी के साथ आरोपी के दरवाजे पर पहुंची, तो ग्रामीण दंग रह गए। पुलिस का मकसद साफ था—फरार आरोपी को समाज के सामने बेनकाब करना और उसे यह संदेश देना कि वह कानून की नजरों से बच नहीं सकता।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरी कार्रवाई एक नाबालिग लड़की के अपहरण से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि आरोपी युवक ने काफी समय पहले एक नाबालिग का अपहरण किया था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की थी। गिरफ्तारी के डर से आरोपी युवक काफी दिनों से पुलिस को छका रहा था और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। बार-बार दबिश देने के बावजूद जब वह हाथ नहीं आया, तो पुलिस ने न्यायालय की शरण ली।
घर पर चस्पा किया गया ‘इश्तहार’
न्यायालय के आदेशानुसार, पुलिस ने आरोपी के घर की दीवार पर धारा 82 के तहत इश्तहार चस्पा किया। इस प्रक्रिया के दौरान बैंड-बाजा बजाकर पूरे गांव को सूचित किया गया कि यह व्यक्ति कानून की नजर में भगोड़ा है। पुलिस ने बाकायदा मुनादी (Announce) की और गांव वालों को बताया कि आरोपी के खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और वह फरार चल रहा है।
“आत्मसमर्पण करो, वरना कुर्की-जब्ती होगी”
कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे पुलिस अधिकारियों ने आरोपी के परिजनों और ग्रामीणों के सामने सख्त चेतावनी दी। पुलिस ने स्पष्ट लहजे में कहा कि यदि आरोपी ने जल्द ही न्यायालय या संबंधित थाने में आत्मसमर्पण नहीं किया, तो अगली कार्रवाई ‘कुर्की-जब्ती’ (घर का सामान जब्त करना) की होगी। इश्तहार चस्पा होना कुर्की की कार्रवाई से पहले की आखिरी चेतावनी मानी जाती है।
पुलिस के इस कदम की चर्चा
मुजफ्फरपुर पुलिस का यह ‘म्यूजिकल एक्शन’ अब सोशल मीडिया और स्थानीय इलाकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस का मानना है कि इस तरह की सार्वजनिक कार्रवाई से फरार अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ता है और समाज में भी यह संदेश जाता है कि अपराध करके छिपना मुमकिन नहीं है। भारथीपुर गाँव में हुई इस कार्रवाई के बाद अब आरोपी के सरेंडर करने की संभावना बढ़ गई है।