BNT Desk: बिहार के मोतिहारी से सामने आई यह तस्वीर धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानियत और भाईचारे का संदेश देती है। पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया गांव में बन रहे विराट रामायण मंदिर परिसर में 17 जनवरी को विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना होने जा रही है। इस भव्य धार्मिक आयोजन की सबसे खास बात यह है कि मंदिर परिसर के लिए लगभग 20 एकड़ भूमि मुस्लिम परिवारों द्वारा भगवान शिव और श्रीराम के नाम पर दान की गई है। यह पहल सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास की एक अनोखी मिसाल बनकर उभरी है।
जहां पहचान नहीं, इंसान देखा जाता है
कैथवलिया में नफरत नहीं, बल्कि भरोसा और सहयोग की भावना दिखती है। मंदिर परिसर के आसपास रोज़गार कर रहे लोग कहते हैं कि यहां कोई यह नहीं पूछता कि आप किस धर्म से हैं। खिलौने बेचने वाले मोहम्मद जमील बताते हैं कि हिंदू-मुसलमान का फर्क किए बिना सभी को बराबर सम्मान और काम मिल रहा है। शिवलिंग और मंदिर निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर बढ़े हैं, जिसका लाभ हर समुदाय को मिल रहा है।
रोज़गार से बदली ज़िंदगी
मंदिर परिसर के आसपास मुस्लिम विक्रेताओं की आमदनी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 75 वर्षीय मोहम्मद शमी बांसुरी बेचकर अपनी दवाइयों का खर्च निकाल पा रहे हैं। वहीं एहसान रोज़ करीब 60 किलोमीटर का सफर तय कर गुब्बारे बेचने आता है और प्रतिदिन 600 से 700 रुपये तक कमा लेता है। इसी आमदनी से वह अपनी बहनों की पढ़ाई और घर का खर्च चला रहा है। यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आजीविका का साधन भी बन गया है।
साझा भविष्य का प्रतीक बना शिवलिंग
मोतिहारी से उठती यह कहानी बताती है कि देवता कभी नहीं बंटते, बंटती है तो सिर्फ सोच। कैथवलिया में स्थापित होने वाला यह विशाल शिवलिंग अब केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि साझा संस्कृति, आपसी सम्मान और मिल-जुलकर आगे बढ़ने के संकल्प का प्रतीक बन चुका है। यह पहल देश को यह संदेश देती है कि अगर सोच सकारात्मक हो, तो धर्म दीवार नहीं, पुल बन सकता है।