मोकामा में बुलडोजर एक्शन: विधायक अनंत सिंह का आश्वासन भी नहीं आया काम, 40 रेल क्वार्टरों को किया गया जमींदोज

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BNT Desk: दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले मोकामा रेलवे स्टेशन परिसर में गुरुवार को भारी गहमागहमी और तनाव के बीच रेल प्रशासन का कड़ा डंडा चला। महीनों से चल रहे विवाद और सियासी आश्वासनों के बीच, आखिरकार रेलवे के ‘एवेंडड क्वार्टर्स’ (Abandoned Quarters) पर बुलडोजर चल गया। इस कार्रवाई ने उन दर्जनों परिवारों को बेघर कर दिया है, जो दशकों से इन कमरों को अपना आशियाना मानकर रह रहे थे।

सबसे खास बात यह रही कि मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के भरोसे के बावजूद रेलवे प्रशासन अपने फैसले से टस से मस नहीं हुआ और भारी सुरक्षा बल की तैनाती के साथ ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई।

विधायक के दरबार से मिली थी ‘राहत’, पर डीआरएम के ‘तेवर’ पड़े भारी

इस कार्रवाई से ठीक पहले क्वार्टर में रह रहे दर्जनों परिवारों ने स्थानीय विधायक अनंत सिंह से मुलाकात की थी। पीड़ितों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए गुहार लगाई थी कि उनके पास रहने का कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। विधायक अनंत सिंह ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा था कि, “घबराइए मत, हम कुछ व्यवस्था करते हैं।” विधायक के इस भरोसे के बाद लोगों को उम्मीद थी कि शायद तोड़फोड़ रुक जाएगी या उन्हें कुछ और समय मिल जाएगा। लेकिन दानापुर मंडल रेल प्रबंधक (DRM) विनोद कुमार के कड़े रुख ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसी सप्ताह मोकामा स्टेशन का निरीक्षण करने पहुंचे डीआरएम ने इन जर्जर क्वार्टरों को तत्काल गिराने का सख्त आदेश दिया था, जिसके बाद गुरुवार को यह बड़ी कार्रवाई हुई।

22 मार्च को ही थमा दिया गया था अल्टीमेटम

रेलवे प्रशासन की यह कार्रवाई अचानक नहीं थी। बीते 22 मार्च को ही रेल अधिकारियों ने सभी चिन्हित क्वार्टरों पर नोटिस चिपका दिया था, जिसमें स्पष्ट निर्देश था कि निर्धारित समय के भीतर परिसर खाली कर दें। हालांकि, बेघर होने के डर से और राजनीतिक संरक्षण की उम्मीद में लोगों ने क्वार्टर खाली नहीं किए। गुरुवार सुबह जब भारी संख्या में जीआरपी (GRP), आरपीएफ (RPF) और स्थानीय पुलिस बल के साथ बुलडोजर मौके पर पहुंचा, तो लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई।

40 क्वार्टर जमींदोज, रिटायर्ड कर्मचारियों के परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

प्रशासन ने एक-एक कर करीब 40 एवेंडड क्वार्टरों को ध्वस्त कर दिया। इन क्वार्टरों में ज्यादातर रेलवे के रिटायर्ड चतुर्थ वर्गीय (Group D) कर्मचारियों के परिवार रह रहे थे। इनमें से कई परिवार ऐसे थे जो पिछले 20-30 वर्षों से यहाँ बसे हुए थे। घर टूटने के बाद अपना सामान सड़क पर समेटती एक पीड़ित महिला ने रोते हुए कहा, “साहब! विधायक जी बोले थे कि कुछ नहीं होगा, लेकिन आज हमारा सब कुछ मिट्टी में मिल गया। अब हम इस धूप में बच्चों को लेकर कहाँ जाएंगे?”

‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के कारण हुई कार्रवाई

मोकामा स्टेशन पर इस बड़ी कार्रवाई के पीछे रेलवे का विकास का खाका है। केंद्र सरकार की ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत मोकामा स्टेशन का कायाकल्प होना है। इस योजना के अंतर्गत:

  • स्टेशन परिसर का विस्तार किया जाना है।

  • यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं और नए भवनों का निर्माण होना है।

  • पुराने और जर्जर ढांचे को हटाकर नई पार्किंग और वेटिंग एरिया बनाया जाना है।

रेलवे का कहना है कि ये क्वार्टर न केवल जर्जर होकर खतरनाक हो चुके थे, बल्कि विकास कार्यों में बड़ी बाधा भी बन रहे थे।

अफरा-तफरी का माहौल और भविष्य की चिंता

जैसे ही बुलडोजर ने पहली दीवार पर प्रहार किया, पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। लोग आनन-फानन में अपना बर्तन, बिस्तर और जरूरत का सामान बाहर निकालने लगे। प्रशासन की मुस्तैदी के कारण विरोध की कोई बड़ी घटना तो नहीं हुई, लेकिन लोगों के चेहरे पर अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता और गुस्सा साफ देखा जा सकता था।

विकास बनाम विस्थापन

मोकामा की यह घटना एक बार फिर विकास और विस्थापन के बीच के संघर्ष को बयां करती है। जहाँ एक तरफ रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाने की कवायद जरूरी है, वहीं दशकों से बसे गरीब परिवारों का इस तरह बेघर होना सामाजिक चिंता का विषय है। विधायक अनंत सिंह का दखल भी इस बार रेल प्रशासन की कानूनी और विकासपरक कार्रवाई के सामने बेअसर साबित हुआ।

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