पटना: चंद्रग्रहण के कारण महावीर मंदिर के कपाट 7 घंटे रहेंगे बंद, दर्शन से पहले जानें आरती का नया समय

3 मार्च को चंद्रग्रहण के चलते पटना के महावीर मंदिर के कपाट दोपहर 2:30 से रात 9:00 बजे तक बंद रहेंगे। सूतक काल के कारण संध्या आरती के समय में भी बदलाव किया गया है। ग्रहण के बाद शुद्धिकरण और दर्शन की प्रक्रिया रात 9:05 बजे से दोबारा शुरू होगी।

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BNT Desk: आस्था के प्रमुख केंद्र महावीर मंदिर में इस बार चंद्रग्रहण को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है। ग्रहण के सूतक काल और शुद्धिकरण प्रक्रिया के कारण मंदिर के कपाट पूरे सात घंटे तक बंद रहेंगे। मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के लिए निकलने से पहले नए समय की जानकारी जरूर ले लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

दोपहर 2:30 बजे से बंद रहेगा मंदिर

मंगलवार, 3 मार्च को लगने वाले चंद्रग्रहण का समय शाम 5:50 बजे से 6:46 बजे तक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से पहले ही सूतक काल प्रभावी हो जाता है। इसी कारण महावीर मंदिर के पट दोपहर 2:30 बजे से रात 9:00 बजे तक बंद रहेंगे। इस दौरान श्रद्धालु हनुमान जी या किसी भी अन्य देवी-देवता के दर्शन नहीं कर पाएंगे। रात 9:00 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा, जिसके बाद रात 9:05 बजे पट दोबारा खोले जाएंगे। भक्त दोपहर 2:30 बजे से पहले ही दर्शन कर सकते हैं।

कब होगी संध्या आरती?

मंदिर प्रबंधन के अनुसार होली के दिन 4 मार्च से संध्या आरती के समय में बदलाव किया गया है। अब शाम की आरती रात 8 बजे आयोजित की जाएगी। पहले यह आरती शाम 7:30 बजे होती थी। भीड़ और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अन्य आरतियों का समय फिलहाल पूर्ववत रहेगा।

मंगला आरती: सुबह 5:00 बजे

भोग आरती: सुबह 11:00 बजे

संध्या आरती (नया समय): रात 8:00 बजे

ग्रहण के दौरान क्या रखें सावधानी?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण काल में मूर्ति पूजा और मूर्तियों का स्पर्श वर्जित माना जाता है। इस समय भोजन पकाने या खाने से बचना चाहिए। नए कार्य की शुरुआत और तुलसी के पौधे को छूने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। उन्हें तेज धार वाले औजारों का प्रयोग न करने की हिदायत दी जाती है। साथ ही चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से देखने से बचना चाहिए। परंपरा के अनुसार ग्रहण से पहले भोजन और पानी में कुश डालने की मान्यता भी है, ताकि नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके।

 

 

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