BNT Desk: महाराष्ट्र में प्रस्तावित बिहार भवन को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कड़े विरोध के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। मनसे की आपत्ति के बाद यह मामला सिर्फ एक भवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रवासी बिहारियों के सम्मान और अधिकारों से भी जुड़ गया है। इसी बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने मनसे के विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।
मनसे राजनीतिक जमीन खो चुकी है: उपेंद्र कुशवाहा
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि मनसे की राजनीतिक जमीन अब खिसक चुकी है, जिसका साफ संकेत हाल ही में हुए निकाय चुनावों में मिल चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी हताशा के कारण मनसे अब बिहारियों को निशाना बनाकर अपना राजनीतिक खेल खेलना चाहती है। कुशवाहा ने कहा कि ऐसे बयान देकर मनसे सुर्खियों में आना चाहती है, लेकिन इससे उसे कोई फायदा नहीं होगा। जनता सच्चाई समझती है और इस तरह की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।
आपत्तिजनक बयान पर कार्रवाई की मांग
कुशवाहा ने मनसे के बयान को बेहद आपत्तिजनक करार दिया और कहा कि इस तरह की टिप्पणियां समाज को बांटने का काम करती हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे बयानों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहारी आज देश के हर कोने में मेहनत कर रहे हैं। महाराष्ट्र में भी लाखों बिहारी रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में अहम योगदान दे रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ बयान देना न केवल गलत है, बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण भी है।
बिहार भवन बनेगा, विरोध से नहीं रुकेगा काम
उपेंद्र कुशवाहा ने साफ शब्दों में कहा कि काम, पढ़ाई और इलाज के लिए बिहार के लोग वर्षों से महाराष्ट्र जाते रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार भवन की जरूरत इसलिए है ताकि वहां रहने वाले बिहारियों को सुविधा मिल सके। कुशवाहा ने दो टूक कहा कि बिहार भवन का निर्माण जरूर होगा और किसी के विरोध से यह काम रुकने वाला नहीं है। वहीं, अपनी पार्टी के विधायकों को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि यह सब सिर्फ मीडिया की बातें हैं और पार्टी पूरी तरह एकजुट है।